मुंबई में नहीं टूटेंगी 14 फीट से ऊंची झोपड़ियां! मेयर रितु तावड़े ने दर्ज कराया विरोध, BMC लेगी यू-टर्न?

Mumbai Slums Demolition: मुंबई में 14 फीट से अधिक ऊंची झोपड़ियों को तोड़ने के BMC के फैसले पर मेयर रितु तावड़े और जनप्रतिनिधियों के कड़े विरोध के बाद प्रशासन पर यू-टर्न लेने का दबाव बढ़ गया है।
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रितु तावडे(सोर्स: डिजाइन फोटो)
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Mumbai 14 Feet Slum Demolition Update: BMC द्वारा शहर की 14 फीट से अधिक ऊंचाई वाली झोपड़ियों को तोड़ने के फैसले पर खड़ा हुआ राजनीतिक विवाद अब नया मोड़ ले चुका है। जहां एक तरफ बीएमसी प्रशासन 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर के बीच विशेष अभियान चलाकर 39,000 से अधिक झोपड़ियों पर तोड़क कार्रवाई करने की योजना बना रहा था, वहीं अब इस कार्रवाई पर ब्रेक लगता दिखाई दे रहा है।

मुंबई की महापौर रितु तावड़े ने बीएमसी प्रशासन के इस एकतरफा फैसले के खिलाफ जोरदार विरोध दर्ज कराया है और स्पष्ट किया है कि महायुति सरकार जनता के घर बचाने आई है, उन्हें ध्वस्त करने नहीं। महापौर के इस कड़े रुख और जनप्रतिनिधियों के भारी दबाव के बाद अब बीएमसी प्रशासन के यू-टर्न लेने की संभावना बेहद प्रबल हो गई है।

सभागृह नेता का पत्र पूरी बीएमसी का विरोध

महापौर तावड़े ने यह भी उजागर किया कि बीएमसी के सभागृह नेता एवं भाजपा नगरसेवक गणेश खणकर ने इस तोड़क कार्रवाई की योजना सामने आते ही बीएमसी आयुक्त अश्विनी भिड़े को पत्र लिखकर कड़ा विरोध जताया था।

रितु तावड़े ने कहा कि सभागृह नेता द्वारा पत्र दिया जाना पूरे 227 नगरसेवकों और पूरे बीएमसी सदन की भावना को दर्शाता है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यदि प्रशासन ने जनप्रतिनिधियों की सहमति के बिना यह निर्णय थोपने की कोशिश की है, तो इस कार्रवाई को किसी भी स्थिति में होने नहीं दिया जाएगा।

हम घर बचाने आए हैं, तोड़ने नहीं

महापौर रितु तावड़े ने बीएमसी प्रशासन के इस कदम पर अपनी कड़ी आपत्ति जताते हुए स्पष्ट किया कि भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना के महायुति गठबंधन का मुख्य उद्देश्य नागरिकों को राहत देना है। उन्होंने कहा, "हम यहां लोगों के घर बचाने आए हैं, उन्हें तोड़ने नहीं आए हैं।

मैं किसी भी नागरिक का घर तोड़े जाने के सख्त खिलाफ हूं और किसी भी सूरत में गरीबों का घर नहीं टूटना चाहिए। महापौर ने बीएमसी प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब जनप्रतिनिधि जनता के बीच जाते हैं, तो उन्हें लोगों के सवालों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में महापौर, उपमहापौर और जनप्रतिनिधियों को विश्वास में लिए बिना इतना बड़ा और संवेदनशील फैसला लेना बिल्कुल अनुचित है।

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39 हजार झोपड़ियां थीं बीएमसी के निशाने पर

उल्लेखनीय है कि बीएमसी ने मुंबई शहर और उपनगरों में स्थित 39,111 ऐसी झोपड़ियों की सूची तैयार की थी, जिनकी ऊंचाई 14 फीट या उससे अधिक है। बीएमसी प्रशासन ने 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर के बीच इनके निष्कासन का विशेष अभियान चलाने की घोषणा की थी।

हालांकि, जैसे ही यह खबर सार्वजनिक हुई, बीएमसी की स्थायी समिति से लेकर राजनीतिक गलियारों में भारी हंगामा मच गया। स्थायी समिति में विभिन्न दलों के पार्षदों ने एक सुर में विरोध करते हुए कहा कि बिना किसी पुनर्वास योजना के वर्षों से रह रहे गरीबों के सिर से छत छीनना सरासर अन्याय है।

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अब बीएमसी के सामने यू-टर्न ही रास्ता

इस मुद्दे पर न केवल सत्ताधारी महायुति के प्रमुख नेता, बल्कि विपक्षी दल कांग्रेस, शिवसेना ठाकरे गुट पूरी तरह से लामबंद हैं। कांग्रेस के बीएमसी गुट नेता अशरफ आजमी, शिवसेना (UBT) के यशोधर फणसे और सपा के रईस शेख व अबू आजमी ने इस अभियान को तुरंत वापस लेने और पहले प्रभावित परिवारों का पुनर्वास करने की मांग रखी है।

अब जब मुंबई की मेयर रितु तावड़े, सभागृह नेता गणेश खणकर और पूरा बीएमसी सदन इस कार्रवाई के विरोध में खड़ा हो गया है, तो बीएमसी प्रशासन पर इस फैसले को तुरंत वापस लेने का भारी राजनीतिक दबाव बन गया है। यही वजह है कि अब बीएमसी द्वारा इस विवादित तोड़क अभियान पर रोक लगाकर यू-टर्न लेना लगभग तय माना जा रहा है।

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