मुंबई 3.0 की तैयारी: रायगढ़ के 124 गांवों को मिलाकर बसेगा नया शहर, बजट में 4,000 करोड़ रुपये का प्रावधान

Mumbai MMRDA Project: महाराष्ट्र सरकार रायगढ़ जिले के 124 गांवों को मिलाकर मुंबई 3.0 कर्नाला-साई-चिरनेर न्यू टाउन विकसित कर रही है। एमएमआरडीए को 4,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
Preparing for Mumbai 3.0: A new city to be established by integrating 124 villages in Raigad
मुंबई योजना, प्रतीकात्मक तस्वीरसोर्स- सोशल मीडिया
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Karnala Sai Chirner New Town: जमीन की कमी, महंगे घरों और बढ़ते बुनियादी ढांचे के दबाव के बीच महाराष्ट्र सरकार मुंबई के विस्तार के लिए नई शहरी योजना पर काम कर रही है। इसके तहत नवी मुंबई से आगे रायगढ़ जिले के उरण, पनवेल और पेण तालुका के 124 गांवों को मिलाकर 323.44 वर्ग किमी क्षेत्र में ‘मुंबई 3.0’ यानी कर्नाला-साई-चिरनेर न्यू टाउन विकसित किया जाएगा।

MMRDA को मिली जिम्मेदारी

इस परियोजना के लिए एमएमआरडीए को न्यू टाउन डेवलपमेंट अथॉरिटी बनाया गया है। राज्य के 2026-27 के बजट में परियोजना के लिए 4,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। योजना का उद्देश्य मुंबई और नवी मुंबई पर बढ़ते आवासीय तथा बुनियादी ढांचे के दबाव को कम करना है।

104 वर्ग किमी में टाउनशिप और इंडस्ट्रियल कॉरिडोर

कर्नाला-साई-चिरनेर न्यू टाउन को नए आर्थिक और आवासीय केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है। प्रस्तावित क्षेत्र अटल सेतु और नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के करीब है। योजना के तहत करीब 104 वर्ग किमी क्षेत्र में टाउनशिप और औद्योगिक कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे।

IT, डेटा सेंटर और लॉजिस्टिक्स को बढ़ावा

नए शहर में आईटी और आईटीईएस, वित्तीय सेवाएं, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर, डेटा सेंटर, स्वास्थ्य, शिक्षा, लॉजिस्टिक्स और वाणिज्यिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की योजना है। रोजगार और आवास को एक साथ विकसित करना इसका प्रमुख उद्देश्य है, ताकि लोगों को रोजाना लंबी दूरी की यात्रा न करनी पड़े।

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अटल सेतु से एक्सप्रेसवे तक कनेक्टिविटी

न्यू टाउन को अटल सेतु, नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, पनवेल-कर्जत रेल कॉरिडोर, विरार-अलीबाग मल्टीमॉडल कॉरिडोर और मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे से बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे नए रियल एस्टेट माइक्रो-मार्केट और रोजगार के अवसर विकसित हो सकते हैं।

भू-मालिकों को मिलेंगे कई विकल्प

124 गांवों में भूमि अधिग्रहण के लिए भू-मालिकों को मुआवजा, विकास अधिकार और लैंड पूलिंग जैसे विकल्प दिए जा रहे हैं। योजना के पहले चरण के दशक के अंत तक आकार लेने की उम्मीद है, जबकि पूरे शहरी क्षेत्र के विकास में इससे अधिक समय लग सकता है।

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