मुंबई में भूस्खलन का खतरा बरकरार: मानसून से पहले 329 सुरक्षा कार्य अधूरे, एक लाख लोगों की जान जोखिम में

Mumbai Monsoon News: मुंबई में मानसून पूर्व सुरक्षा कार्यों में बड़ी ढिलाई सामने आई है। पहाड़ी ढलानों पर भूस्खलन रोकने के 300 से अधिक कार्य अधूरे रहने से एक लाख लोगों की जान दांव पर है।
Over 300 landslide prevention works remain incomplete in Mumbai ahead of monsoon, putting around one lakh lives at risk across various high-risk hill slopes.
पहाड़ियों पर भूस्खलन (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Mumbai BMC Monsoon Safety Landslide Risk: मुंबई शहर में मानसून के आगमन से पहले शहर की संवेदनशील पहाड़ी ढलानों पर भूस्खलन रोकथाम के 300 से अधिक कार्य अब भी अधूरे पड़े हैं, जिससे उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में रहने वाले लगभग एक लाख लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। बीएमसी के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023 से अब तक शुरू किए गए 749 भूस्खलन-निवारण कार्यों में से केवल 440 पूरे हुए हैं। 329 स्थानों पर काम या तो लंबित है या अभी तक शुरू ही नहीं हुआ है, जबकि विशेषज्ञ लगातार चेतावनी देते रहे हैं और शहर में भूस्खलन की कई घातक घटनाएं हो चुकी हैं।

इन सुरक्षा उपायों की सिफारिश भारत के भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) ने वर्ष 2018 में मुंबई के भूस्खलन-प्रवण क्षेत्रों और उनसे सटी मानव बस्तियों का एक वर्ष तक अध्ययन करने के बाद की थी। मुंबई में हर मानसून के दौरान भूस्खलन एक गंभीर खतरा बना रहता है।

107 भूस्खलन की घटनाएं घटी

बीएमसी के आपदा प्रबंधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 2021 से 2025 के बीच शहर में 107 भूस्खलन की घटनाएं दर्ज की गई, जिनमें 31 लोगों की मौत हुई और 25 लोग घायल हुए। वर्तमान में मुंबई शहर में 249 भूस्खलन-प्रवण स्थान चिन्हित किए गए हैं, जिनमें 150 से 200 मीटर ऊंची पहाड़ियां और रिज क्षेत्र शामिल हैं। इनमें से कई ढलान चट्टानी, बंजर या ढीली मिट्टी से ढके हुए हैं, जिससे भारी बारिश के दौरान इनके खिसकने का खतरा बढ़ जाता है। कई स्थान पुराने खदान क्षेत्रों में स्थित हैं, जहां खुदाई के कारण प्राकृतिक भू-आकृति प्रभावित हुई है।

कांजुरमार्ग, विक्रोली, घाटकोपर व कुर्ला में कई जगह संवेदनशील

इन ढलानों पर मुख्य रूप से झुग्गी बस्तियां बसी हुई है, जहां कम आय वाले परिवार और प्रवासी मजदूर रहते हैं। सरकारी अनुमान के अनुसार, लगभग एक लाख लोग इन उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में निवास करते हैं। 249 संवेदनशील स्थानों में से 74 को "खतरनाक" और 46 को अत्यंत खतरनाक श्रेणी में रखा गया है। सबसे अधिक 116 संवेदनशील स्थल एस वार्ड (कांजुरमार्ग और विक्रोली) में है।

घाटकोपर में 32 और कुलों में 17 स्थान हैं। वहीं मालाबार हिल जैसे समृद्ध क्षेत्रों में भी 15 भूस्खलन-प्रवण स्थल मौजूद हैं। चट्टानों और मलबे को नीचे की बस्तियों पर गिरने से रोकने के लिए जीएसआई ने संवेदनशील ढलानों पर सुरक्षात्मक रिटेनिंग वॉल (सहारा दीवारें) बनाने की सिफारिश की थी। नागरिक अभिलेखों के अनुसार, 2023 से 2026 के बीच 749 सुरक्षा कार्य शुरू किए गए। इनमें से 440 पूरे हो चुके हैं, जबकि 329 अभी भी अधूरे है।

धन और तकनीकी चुनौतियां बनी बाधा

रिटेनिग वॉल परियोजनाओं को झुग्गी पुनर्वास प्राधिकरण और लोक निर्माण विभाग द्वारा लागू किया जा रहा है। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, 2020 से 2023 के बीच भूस्खलन रोकथाम कार्यों के लिए 400 करोड़ रुपये से अधिक की राशि आवंटित की गई थी। अधिकारियों का कहना है कि वित्तीय सहायता की गति धीमी पड़ गई, जिससे परियोजनाओं के क्रियान्वयन पर असर पड़ा,

एक अधिकारी ने बताया कि बीएमसी, एसआरए, कलेक्टर व पीडब्ल्यूडी जैसी कई एजेंसियों की भागीदारी के कारण धन स्वीकृत कराने की प्रक्रिया जटिल हो जाती है। बीएमसी हर वर्ष नए जोखिम आकलन करती है, जिससे नए संवेदनशील स्थान सामने आते रहते हैं। कई जगह अतिक्रमणकारियों द्वारा रिटेनिग वॉल के जल निकासी छिद्र (वीप होल) बंद कर दिए जाते हैं, जिससे पानी बाहर नहीं निकल पाता।

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