Ritu Tawde Beacon Light Controversy (फोटो क्रेडिट-X)
Ritu Tawde Mahindra Scorpio Flasher Lights: मुंबई की नवनियुक्त मेयर रितु तावड़े अपनी नई आधिकारिक गाड़ी को लेकर कानूनी विवादों के घेरे में आ गई हैं। विवाद की मुख्य वजह उनकी सरकारी महिंद्रा स्कॉर्पियो पर लगी लाल और नीली ‘बीकन लाइट’ (Flasher Lights) है। सोशल मीडिया पर गाड़ी की तस्वीरें वायरल होने के बाद, नागरिक और राजनीतिक विश्लेषक इसे ‘वीआईपी कल्चर’ (VIP Culture) की वापसी बता रहे हैं। गौरतलब है कि मई 2017 में केंद्र सरकार ने समानता को बढ़ावा देने के लिए आपातकालीन सेवाओं को छोड़कर सभी सरकारी वाहनों पर लाल और नीली बत्ती के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया था।
विपक्ष और कानून के जानकारों का तर्क है कि मुंबई मेयर की गाड़ी पर इन लाइटों का होना ‘केंद्रीय मोटर वाहन नियम’ का सीधा उल्लंघन है। इन नियमों के अनुसार, केवल पुलिस, फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाओं को ही फ्लैशर लाइट इस्तेमाल करने का अधिकार है। मेयर पद एक सम्मानित प्रशासनिक पद है, न कि कोई इमरजेंसी सर्विस, ऐसे में लाइटों का इस्तेमाल कानूनन सवालों के घेरे में है।
आलोचकों का कहना है कि 2017 में जब ऐतिहासिक फैसला लिया गया था, तब इसका मकसद मंत्रियों और अधिकारियों के बीच से ‘खास’ होने के अहसास को खत्म करना था। मेयर रितु तावड़े की गाड़ी पर पुलिस जैसी लाइटें दिखना उस कानून की भावना के विपरीत है। कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि परिवहन विभाग को इस पर संज्ञान लेना चाहिए और अवैध रूप से बत्ती लगाने के लिए चालान काटा जाना चाहिए।
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रितु तावड़े मुंबई की राजनीति का एक कद्दावर चेहरा हैं। वे लगातार तीन बार अलग-अलग वार्डों से पार्षद चुनी गई हैं, जो उनकी जमीनी पकड़ को दर्शाता है। मूल रूप से कांग्रेस में रहीं तावड़े ने 2012 में भाजपा का दामन थामा और वार्ड नंबर 127 से जीत दर्ज की। मराठा समुदाय से ताल्लुक रखने के बावजूद उन्होंने गुजराती बहुल क्षेत्रों में भी अपना दबदबा बनाया। वे महाराष्ट्र प्रदेश महिला मोर्चा की उपाध्यक्ष रह चुकी हैं और भाजपा का एक मुखर मराठी चेहरा मानी जाती हैं।
रितु तावड़े का चुनावी रिकॉर्ड बेहद प्रभावशाली रहा है। 2012 के बाद, उन्होंने 2017 में घाटकोपर के वार्ड नंबर 121 से जीत हासिल की। हाल ही में हुए 2026 के चुनावों में, उन्होंने वार्ड नंबर 132 से अपनी जीत की हैट्रिक पूरी की, जिसके बाद उन्हें मुंबई के मेयर पद की जिम्मेदारी सौंपी गई। हालांकि, कार्यकाल की शुरुआत में ही ‘बत्ती विवाद’ ने उनकी छवि पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन इस उल्लंघन पर क्या रुख अपनाता है।