मेयर चुनाव की आड़ में मराठी राजनीति गरमाई, गोवर्धन देशमुख ने किया ‘मराठी डबल गेम’, शिवसेना (शिंदे) का आरोप
Govardhan Deshmukh: मीरा-भाईंदर मेयर चुनाव को लेकर मराठी राजनीति गरमा गई है, जहां शिवसेना (शिंदे गुट) ने मराठी एकीकरण समिति के अध्यक्ष गोवर्धन देशमुख पर दोहरी राजनीति करने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
- Written By: आंचल लोखंडे
Mira Bhayandar Mayor Election (सोर्सः सोशल मीडिया)
Marathi Politics Maharashtra: मीरा-भाईंदर में आगामी मेयर चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। इसी बीच मराठी एकीकरण समिति के अध्यक्ष गोवर्धन देशमुख को लेकर शिवसेना (शिंदे गुट) ने गंभीर आरोप लगाए हैं। शिवसेना के 146 विधानसभा प्रमुख सचिन मांजरेकर और प्रभाग क्रमांक 14 के प्रभारी संतोष गोले ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि गोवर्धन देशमुख मराठी अस्मिता की आड़ में दोहरी राजनीतिक भूमिका निभा रहे हैं।
सचिन मांजरेकर ने आरोप लगाया कि मनपा चुनाव के दौरान जानबूझकर शिवसेना उम्मीदवारों के खिलाफ उबाठा गुट और मनसे के मराठी उम्मीदवार खड़े किए गए, जिससे भारतीय जनता पार्टी के अमराठी उम्मीदवारों को सीधा लाभ मिला। उनका दावा है कि इन उम्मीदवारों को ‘ए’ और ‘बी’ फॉर्म मराठी एकीकरण समिति के माध्यम से वितरित किए गए थे।
मराठी अस्मिता की बात
उन्होंने सवाल उठाया कि जो व्यक्ति मराठी उम्मीदवारों की हार का कारण बना, वह आज मराठी अस्मिता की बात किस आधार पर कर रहा है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी प्रश्न किया गया कि जब 145 विधानसभा क्षेत्र से अमराठी विधायक चुना गया था, तब मराठी एकीकरण समिति की ओर से कोई प्रतिक्रिया क्यों नहीं आई।
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आंदोलन किसके इशारे पर शुरू
प्रभाग 14 प्रभारी संतोष गोले ने गोवर्धन देशमुख द्वारा हाल ही में शुरू किए गए आंदोलन के समय पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मेयर पद के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू होते ही यह आंदोलन किसके इशारे पर शुरू हुआ, यह स्पष्ट होना चाहिए।
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शहर की शांति से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं
इस दौरान शिवसेना नेताओं ने भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता पर भी निशाना साधा। उनका कहना था कि सोशल मीडिया पर वायरल किए जा रहे वीडियो धार्मिक ध्रुवीकरण की कोशिश हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि रुबीना शेख एक मराठी मुस्लिम परिवार से हैं और मराठी उम्मीदवार हैं, ऐसे में धार्मिक आधार पर राजनीति करना पूरी तरह अनुचित है। अंत में शिवसेना (शिंदे गुट) ने चेतावनी दी कि मराठी पहचान के नाम पर शहर की शांति से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और जनता ऐसे कथित दोहरे रवैये को भली-भांति समझती है।
