Mumbai: फर्जी दस्तावेजों से करोड़ों का स्कैम! लकी सोसायटी पुनर्विकास पर धोखाधड़ी केस
Mumbai News: मालाड की लकी सोसायटी पुनर्विकास में बड़े फर्जीवाड़े का आरोप लगा है। कुरार पुलिस ने दो बिल्डरों सहित सात लोगों पर धोखाधड़ी और दस्तावेज छेड़छाड़ का मामला दर्ज किया है।
- Written By: अपूर्वा नायक
लकी को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी (सौ. सोशल मीडिया )
Mumbai News In Hindi: मालाड पूर्व स्थित लकी को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी के पुनर्विकास में बड़े पैमाने पर धांधली का मामला उजागर हुआ है। कुरार पुलिस ने दो बिल्डरों सहित अन्य पांच लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और दस्तावेजों से छेड़छाड़ का मामला दर्ज किया है।
पुलिस के अनुसार सभी आरोपी फिलहाल फरार हैं। फरार आरोपियों में रसिक ठक्कर, संजय शाह, किसनलाल जे। प्रजापति, नेमीचंद्र जैन, कालीपाड़ा करनमाकर, समीर प्रकाश जोशी और कुनकुबेन जैन शामिल हैं। कुरार पुलिस ने आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 336(2), 338 और 3(8) के तहत केस दर्ज किया है।
फर्जी दस्तावेज बनाकर हुआ घोटाला
पीड़िता नताशा नौशाद शेख ने आरोप लगाया है कि सिद्धिविनायक बिल्डर्स के संचालक रसिक ठक्कर ने सोसायटी के कुछ पदाधिकारियों की मिलीभगत से पुनर्विकास दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा किया, पीड़िता के अनुसार, शुरुआती पुनर्विकास मसौदे में सोसायटी की सभी यूनिट्स-फ्लैट और दुकानें-स्पष्ट रूप से उल्लेखित थीं।
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शेख परिवार की दुकान क्रमांक 8 का विवरण भी असली दस्तावेजों में शामिल था और सदस्यों ने इसी मसौदे पर हस्ताक्षर किए थे। लेकिन रजिस्ट्रेशन के समय यूनिट्स 18 को बदलकर 17 कर दिया गया, जिससे पीड़िता के परिवार के अधिकार प्रभावित हुए। पीड़िता के अनुसार यह कई करोड़ों के लैंड स्कैम का मामला हो सकता है। इस मामले को ईओडब्ल्यू को सौपना चाहिए।
तीन मंजिल बिना सीसी के बनाने का लगाया आरोप
वहीं सोशल वर्कर निलेश सिंगाड़िया ने भी एक प्रेस – कांफ्रेंस के माध्यम से बिल्डर रसिक ठक्कर पर तीन मंजिल बिना सीसी के बनाने का आरोप लगाया है। सिंगाडिया ने एसआरए की तरफ से जारी दस्तावेजों को दिखाते हुए कहा कि एसआरए ने बिल्डर ठक्कर के खिलाफ एमआरटीपी 53 (6) का नोटिस भी 6 महीने से जारी किया है।
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इस नोटिस को एसआरए ने स्थानीय कुरार पुलिस को भी बिल्डर पर एमआरटीपी 53 (6) के तहत कार्रवाई करने को लिखा है। लेकिन पुलिस ने अब तक इस मामले में कोई भी कार्रवाई नहीं की है। हालांकि बिल्डर रसिक ठक्कर ने इस मामले को पूर्ण रूप से झूठा बताया है, उन्होंने कहा कि पुलिस अधिकारी ने पूर्ण रूप से जांच किए बिना ही हम सबका नाम लिखा है।
