
मंत्री माणिकराव कोकाटे (सोर्स: सोशल मीडिया)
Mumbai News:राज्य के स्थानीय निकाय चुनावों के लिए प्रचार तेज़ी से चल रहा है, और इस दौरान विरोधियों से ज्यादा सत्तारूढ़ महायुति के घटक दलों के बीच घमासान देखने को मिल रहा है। डीसीएम शिंदे बनाम सीएम देवेंद्र, नीलेश राणे बनाम बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण के बाद अब खेल मंत्री माणिकराव कोकाटे और बीजेपी के बीच एक और राजनीतिक जंग छिड़ी है। यह जंग तब सामने आई जब मंत्री कोकाटे ने सिन्नर में बीजेपी द्वारा किए गए एक कदम को लेकर जमकर नाराजगी व्यक्त की।
मंत्री कोकाटे ने बीजेपी को “भ्रष्ट पार्टी” कहते हुए आलोचना की और कहा कि बीजेपी ने न सिर्फ उनके सगे भाई भारत कोकाटे को तोड़ा, बल्कि अब सांसद राजा वाजे के परिवार के साथ भी ऐसा ही किया है। कोकाटे का आरोप था कि बीजेपी दूसरों की पार्टी तोड़कर और नेताओं को चुराकर बड़ी बन रही है, लेकिन पार्टी में अब पुराने और निष्ठावान कार्यकर्ताओं का कोई महत्व नहीं बचा है।
मंत्री कोकाटे ने सिन्नर की एक रैली में बोलते हुए कहा, “पहले जब मैं मंत्री नहीं था तो सिन्नर की गलियों में घूमता था। अब मंत्री बनने के बाद मैं यहां ठीक से घूम भी नहीं पाता हूं।” उन्होंने यह भी कहा कि महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों में घूमने के दौरान उन्हें यह महसूस हुआ कि राज्य की राजनीति में असली लड़ाई महायुति के घटक दलों के बीच चल रही है, न कि विपक्ष से। कोकाटे ने बीजेपी पर आरोप लगाते हुए कहा, “बीजेपी पूरी तरह से भ्रष्ट हो चुकी है और उसकी राजनीति सिर्फ तोड़फोड़ और झगड़ों में ही घिरी हुई है।”
इसके अलावा, कोकाटे ने एक सच्चाई भी स्वीकार की, जिसमें उन्होंने कहा कि भले ही सिन्नर के इस चुनाव में महायुति के तीनों प्रमुख घटक दल एक दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं और तीखे आरोप-प्रत्यारोप कर रहे हैं, लेकिन यह भी सच है कि 2 दिसंबर के बाद ये सब फिर एक साथ बैठेंगे। इस बयान से यह स्पष्ट होता है कि महायुति के भीतर अंदरूनी तकरार के बावजूद गठबंधन में टूट नहीं होगी और चुनावों के बाद सभी फिर से एकजुट हो जाएंगे।
कोकाटे ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उनकी पार्टी पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि वे पिछले 10 वर्षों से सिन्नर नगर परिषद के मुख्य अधिकारी को बदलने की मांग कर रहे हैं, लेकिन नगर विकास विभाग, जो शिंदे के अधीन आता है, इस पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। इसके साथ ही, उन्होंने लाडली बहन योजना के श्रेय लेने को लेकर बीजेपी और शिवसेना (शिंदे गुट) की आलोचना की।
मंत्री कोकाटे ने एक बार फिर किसानों की कर्जमाफी पर विवादित बयान दिया। उन्होंने कहा, “किसानों को कर्जमाफी मत दो, उन्हें 70% सब्सिडी पर स्कीम दो। मुफ्त में कुछ नहीं देना चाहिए। मुफ्त देंगे तो गड़बड़ी होती है।” उनका यह बयान राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर सकता है, क्योंकि किसानों की कर्जमाफी हमेशा से एक संवेदनशील मुद्दा रहा है।
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कोकाटे के इन बयानों पर मंत्री भरत गोगावले ने प्रतिक्रिया दी और कहा, “महायुति सरकार के गठन के डेढ़ साल बाद आप हमारे गठबंधन में शामिल हुए, आपको किसने बुलाया था? पचता और जंचता नहीं होगा तो हमारे साथ क्यों आए?” यह बयान इसलिए अहम है क्योंकि माना जा रहा है कि गोगावले ने यह प्रतिक्रिया उपमुख्यमंत्री अजीत पवार की राकां के प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे के प्रति अपनी नाराजगी के कारण दी है। रायगढ़ जिले के पालकमंत्री पद को लेकर गोगावले और तटकरे के बीच पिछले एक साल से तनाव बना हुआ है।






