Mumbai Trains News: भारतीय रेल के हालिया निर्णयों को लेकर महाराष्ट्र में असंतोष बढ़ता जा रहा है। यात्रियों का आरोप है कि रेल सेवाओं का झुकाव उत्तर भारत की ओर अधिक किया जा रहा है, जबकि राज्य के भीतर चलने वाली महत्वपूर्ण ट्रेनों में कटौती की जा रही है।
रेलवे की ‘जीरो बेस्ड टाइमटेबल’ नीति के तहत महाराष्ट्र की कई अहम ट्रेनें बंद कर दी गई हैं, वहीं कुछ के मार्ग आंशिक रूप से रद्द किए गए हैं। इसके विपरीत, होली और गर्मी के सीजन को देखते हुए उत्तर भारत के लिए विशेष ट्रेनों की संख्या में बढ़ोतरी की गई है।
सीएसएमटी–मडगांव और एलटीटी–मडगांव ट्रेनों को अब साप्ताहिक कर दिया गया है। वहीं सीएसएमटी–गोरखपुर और एलटीटी–दानापुर ट्रेनों को दैनिक रूप से चलाया जा रहा है। दादर–गोरखपुर ट्रेन सप्ताह में चार दिन तथा दादर–बलिया ट्रेन सप्ताह में तीन दिन कर दी गई है।
मुंबई-कोल्हापुर सह्याद्री एक्सप्रेस, मनमाड–मुंबई गोदावरी एक्सप्रेस, भुसावल–मुंबई पैसेंजर, पुणे–कर्जत–पनवेल पैसेंजर, मुंबई–विजापुर पैसेंजर, पुणे-पनवेल पैसेंजर, पुणे–भुसावल एक्सप्रेस (पनवेल मार्ग), दादर–रत्नागिरी पैसेंजर को बंद किया गया है। इसके स्थान पर दिवा–रत्नागिरी सेवा शुरू की गई है।
दादर–गोरखपुर, दादर–बलिया, एलटीटी–सहरसा ‘अमृत भारत’ तथा पनवेल–अलीपुरद्वार ‘अमृत भारत’ ट्रेनों की शुरुआत की गई है।
कोकण क्षेत्र के यात्रियों को सबसे अधिक नुकसान हुआ है। वर्ष 2020 से पहले चलने वाली दादर–रत्नागिरी पैसेंजर, जो हजारों लोगों के लिए जीवनरेखा मानी जाती थी, अब तक बहाल नहीं की गई है। इसके विपरीत दादर–गोरखपुर ट्रेन को स्थायी रूप से शुरू कर दिया गया है।
कोंकण, मराठवाड़ा, पश्चिम महाराष्ट्र, उत्तर महाराष्ट्र और विदर्भ को जोड़ने वाली राज्यांतर्गत ट्रेनें आम लोगों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। शिक्षा, रोजगार, व्यापार और धार्मिक यात्राओं के लिए इन सेवाओं पर बड़ी संख्या में लोग निर्भर हैं। ऐसे में इन ट्रेनों को बंद या सीमित किए जाने से यात्रियों में तीव्र नाराजगी देखी जा रही है।
यात्रियों का कहना है कि राज्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए रेलवे प्रशासन को संतुलित नीति अपनानी चाहिए, ताकि स्थानीय यात्रियों को असुविधा न हो और क्षेत्रीय संपर्क भी मजबूत बना रहे।