बाल विवाह मुक्त भारत अभियान: महाराष्ट्र की बड़ी जीत, 100 दिनों में रुकवाई 180 से ज्यादा शादियां
Child Marriage Free India Campaign: मंत्री अदिति तटकरे ने 'बाल विवाह मुक्ति रथ' की सफलता की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया के महाराष्ट्र सरकार के 100 दिवसीय अभियान ने 180 संभावित बाल विवाह रोके।
- Written By: आकाश मसने
बालविवाह मुक्ति रथ के साथ मंत्री अदिति तटकरे व अन्य (सोर्स: सोशल मीडिया)
Maharashtra Stops 180 Child Marriages: देश को बाल विवाह के अभिशाप से मुक्त करने की दिशा में महाराष्ट्र सरकार ने एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे ने बताया कि पिछले 100 दिनों में चलाए गए विशेष जागरूकता अभियान के माध्यम से 180 संभावित बाल विवाहों की पहचान कर उन्हें रोकने में सफलता मिली है। इसके अतिरिक्त, ऐन वक्त पर हस्तक्षेप करके 6 बाल विवाह पूरी तरह रुकवाए गए।
मंत्री अदिति तटकरे ने कहा कि अक्टूबर में शुरू हुआ यह सघन अभियान अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर संपन्न हुआ। इसका मुख्य लक्ष्य साल 2030 तक ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ के राष्ट्रीय संकल्प को सिद्ध करना है। इस मुहिम को सफल बनाने के लिए मुंबई जिला और मुंबई उपनगर जिला कार्यालयों ने मिलकर काम किया। विभाग ने ‘कमिटेड कम्युनिटी डेवलपमेंट ट्रस्ट’ (सीसीडीटी) को नोडल एजेंसी के रूप में नियुक्त किया था।
‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ का प्रभाव
जागरूकता फैलाने के लिए मुंबई, उपनगर और पुणे के शहरी स्लम, ग्रामीण तथा आदिवासी क्षेत्रों में ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ चलाया गया। इसके जरिए लोगों को बाल विवाह के शारीरिक और मानसिक दुष्परिणाम, लड़कियों के अधिकारों और शिक्षा का महत्व, चाइल्ड लाइन हेल्पलाइन (1098) की उपयोगिता की जानकारी दी गई। मुंबई जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी शोभा शेलार के अनुसार, इस अभियान में फ्रंटलाइन वर्कर्स और स्थानीय नागरिकों ने सक्रिय भूमिका निभाई।
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‘बालविवाहमुक्त भारत’ या आपल्या संकल्पाला अधिक बळ देण्यासाठी राबविण्यात आलेल्या १०० दिवसांच्या तीव्र जनजागृती मोहिमेचा यशस्वी समारोप झाला. ऑक्टोबरमध्ये सुरू झालेला हा प्रवास ‘आंतरराष्ट्रीय महिला दिना’च्या निमित्ताने एका महत्त्वाच्या टप्प्यावर पोहोचला आहे. २०३० पर्यंत देशाला… pic.twitter.com/CuQWm59V44 — Aditi S Tatkare (@iAditiTatkare) March 10, 2026
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सामूहिक लड़ाई और भविष्य का संकल्प
विशेषज्ञों का मानना है कि यह अभियान केवल सूचना देने तक सीमित नहीं था, बल्कि इसने समाज में सामूहिक प्रतिरोध की भावना पैदा की है। हर बेटी को शिक्षा, सम्मान और सुरक्षित भविष्य देने के लिए समाज के हर वर्ग का साथ आना अनिवार्य है। यह 100 दिवसीय अभियान 2030 के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हुआ है।
