कांग्रेस के हाथ से फिसला मुस्लिम वोट बैंक! ओवैसी-इस्लाम पार्टी ने लगाई सेंध, डैमेज कंट्रोल के लिए चली ये चाल

Maharashtra Politics: महाराष्ट्र के नगर निगम चुनावों में मुस्लिम मतदाताओं का झुकाव AIMIM और इस्लाम पार्टी की ओर बढ़ने से कांग्रेस संकट में है। पार्टी ने अब अपना आधार बचाने के लिए बड़ा फेरबदल किया है।
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राहुल गांधी व असदुद्दीन ओवैसी (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Congress Muslim Vote Strategy: महाराष्ट्र की राजनीति में दशकों से कांग्रेस का मजबूत स्तंभ रहा मुस्लिम वोट बैंक अब खिसकता नजर आ रहा है। हालिया निकाय चुनावों में असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM और शेख आसिफ की 'इस्लाम पार्टी' ने कांग्रेस के गढ़ों में बड़ी सेंधमारी की है। इस राजनीतिक चुनौती से निपटने के लिए कांग्रेस ने मुंबई में अशरफ आजमी को कमान सौंपकर बड़ा दांव खेला है।

महाराष्ट्र के शहरी निकाय चुनावों के नतीजों ने राज्य की भावी राजनीति के संकेत दे दिए हैं। आजादी के बाद से कांग्रेस के साथ मजबूती से खड़े रहने वाले मुस्लिम मतदाताओं का मिजाज अब बदला हुआ नजर आ रहा है। राज्य की 29 नगर महापालिकाओं में से 13 शहरों में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने 126 सीटें जीतकर राजनीतिक विश्लेषकों को चौंका दिया है। इस बदलाव ने न केवल कांग्रेस बल्कि समाजवादी पार्टी के समीकरणों को भी बिगाड़ दिया है।

AIMIM का बढ़ता ग्राफ और कांग्रेस की चिंता

आंकड़ों पर गौर करें तो ओवैसी की पार्टी ने मराठवाड़ा से लेकर विदर्भ और उत्तर महाराष्ट्र तक अपना विस्तार किया है। छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) में पार्टी ने सबसे शानदार प्रदर्शन करते हुए 33 सीटें जीती हैं। इसके अलावा मालेगांव में 21, नांदेड़ में 14 और अमरावती में 12 सीटों पर जीत दर्ज कर AIMIM ने यह साबित कर दिया है कि वह अब केवल एक छोटी खिलाड़ी नहीं रह गई है। इस बढ़ते प्रभाव का असर यह हुआ कि कांग्रेस मुंबई जैसे महानगर में मात्र दो दर्जन सीटों पर सिमट गई और पूरे महाराष्ट्र में 1359 उम्मीदवारों में से केवल 324 ही जीत सके।

मालेगांव में 'इस्लाम पार्टी' ने किया कांग्रेस का सफाया

मुस्लिम बहुल मालेगांव (78% मुस्लिम आबादी) में कांग्रेस को सबसे बड़ा झटका लगा है। यहां पूर्व विधायक शेख आसिफ द्वारा गठित 'इस्लाम पार्टी' (ISLAM) ने 84 में से 35 सीटें जीतकर हलचल मचा दी है। यहां कांग्रेस महज 3 सीटों पर सिमट गई, जबकि 'इस्लाम पार्टी' और सपा गठबंधन अब अपना मेयर बनाने की तैयारी में है। यह परिणाम स्पष्ट करता है कि स्थानीय मुस्लिम नेतृत्व अब राष्ट्रीय पार्टियों के बजाय क्षेत्रीय और धार्मिक पहचान वाली पार्टियों को तरजीह दे रहा है।

कांग्रेस ने मुंबई में अशरफ आजमी पर खेला दांव

अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने और ओवैसी के प्रभाव को कम करने के लिए कांग्रेस ने अब 'मुस्लिम दांव' चला है। पार्टी ने तीन बार के अनुभवी पार्षद और कुशल वक्ता अशरफ आजमी को बीएमसी (BMC) में कांग्रेस पार्षद दल का नेता नियुक्त किया है। गौरतलब है कि मुंबई में कांग्रेस की साख बचाने वाले 24 पार्षदों में से 14 मुस्लिम समुदाय से ही हैं। विधायक अमीन पटेल के नेतृत्व में हुई बैठक में आजमी के नाम पर मुहर लगाई गई, ताकि आगामी चुनौतियों का डटकर मुकाबला किया जा सके।

रणनीतिक बदलाव की जरूरत

वंचित बहुजन आघाडी और अन्य छोटे दलों के साथ गठबंधन के बावजूद कांग्रेस को बीएमसी के इतिहास में सबसे कम सीटें मिली हैं। पार्टी नेतृत्व को यह समझ आ गया है कि केवल पुराने नारों के भरोसे मुस्लिम वोट बैंक को साधे रखना अब मुमकिन नहीं है। इसीलिए, अशरफ आजमी जैसे कद्दावर मुस्लिम चेहरे को आगे कर कांग्रेस समुदाय के बीच अपनी पकड़ फिर से मजबूत करना चाहती है। अब देखना यह होगा कि क्या यह 'चेहरा परिवर्तन' ओवैसी और इस्लाम पार्टी की बढ़ती लहर को रोकने में सफल हो पाता है।

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