सोशल मीडिया पर बदनामी रोकने के लिए महाराष्ट्र सरकार सख्त, डीजीपी की अगुवाई में बनेगी समिति
Social Media पर फर्जी अकाउंट बनाकर लोगों की बदनामी के बढ़ते मामलों को लेकर महाराष्ट्र सरकार सख्त नजर आ रही है। सीएम फडणवीस ने विधानसभा में कहा कि इस समस्या से निपटने के लिए समिति गठित की जाएगी।
- Written By: अपूर्वा नायक
सोशल मीडिया (प्रतीकात्मक तस्वीर )
Devendra Fadnavis Cyber Crime Plan: सोशल मीडिया के बढ़ते दायरे के साथ इसका दुरुपयोग भी जम कर किया जा रहा है। इसके जरिए दूसरे लोगों खासकर विरोधियों को बदनामी करने की घटनाओं में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। लेकिन महाराष्ट्र सरकार ने अब लोगों में बढ़ती इस दुष्प्रवृत्ति पर लगाम लगाने का मन बना लिया है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को विधानसभा में इस संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी। विधानसभा में साइबर धोखाधड़ी से जुड़े प्रश्न के दौरान विधायक प्रशांत ठाकुर ने सोशल मीडिया पर बदनामी का मुद्दा उठाया।
इस दौरान भाजपा विधायक राहुल कुल ने सोशल मीडिया पर फर्जी अकाउंट बनाकर लोगों की बदनाम किए जाने का सवाल उठाया और सरकार से इस पर कड़े कानून की मांग की। विधायक कुल ने कहा कि सोशल मीडिया पर कई संगठित तंत्र काम कर रहे हैं, जो फर्जी अकाउंट बनाकर लोगों की छवि खराब करते हैं।
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उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सबको है, लेकिन इसका दुरुपयोग कर किसी की बदनामी करना गंभीर समस्या बन चुका है। उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या ऐसे मामलों को रोकने के लिए नया कानून लाया जाएगा।
गृह राज्य मंत्री योगेश कदम ने जवाब देते हुए कहा कि साइबर अपराध केवल महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में बढ़ रहे हैं। डिजिटलाइजेशन के कारण पारंपरिक अपराध कम हुए हैं, लेकिन साइबर अपराधों में वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि इन अपराधों से निपटने के लिए महाराष्ट्र में अत्याधुनिक तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, जो एशिया में भी सर्वश्रेष्ठ मानी जाती हैं।
डीजीपी की अगुवाई में बनाई जाएगी समिति
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि सोशल मीडिया पर बिना किसी सबूत के बदनामी करने की घटनाएं काफी बढ़ गई हैं। समाज के हर वर्ग के लोग इससे प्रभावित हो रहे हैं और विशेष रूप से महिलाओं को इसका अधिक सामना करना पड़ता है। उन्होंने आगे कहा कि इस समस्या के समाधान के लिए राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के नेतृत्व में एक समिति गठित की जाएगी।
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आईटी एक्ट की पुरानी धारा फिर लाने का सुझाव
विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने सुझाव दिया कि पहले सूचना प्रौद्योगिकी कानून की धारा 66ए के तहत सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक या बदनामी करने वाली सामग्री डालने पर गिरफ्तारी का प्रावधान था, जिसे बाद में हटाया गया। बढ़ती घटनाओं को देखते हुए इसे फिर से लागू करने पर विचार किया जाना चाहिए। इस पर मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के कारण उस कानून की प्रभावशीलता कम हो गई है। लेकिन इस सुझाव को भी नई समिति के कार्यक्षेत्र में शामिल किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर राज्य स्तर पर नया कानून या संशोधन लाने पर विचार किया जाएगा।
