महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयोग (सोर्स: सोशल मीडिया)
Maharashtra Municipal Elections News: महाराष्ट्र में होने वाले नगर निकाय चुनावों से पहले निर्विरोध चुने गए उम्मीदवारों को लेकर विवाद गहरा गया है। विपक्षी दलों के आरोपों के बीच राज्य निर्वाचन आयोग ने उन नगर निकायों से रिपोर्ट मांगी है, जहां सत्तारूढ़ दलों के उम्मीदवार बिना मुकाबले निर्वाचित हुए हैं।
महाराष्ट्र में आगामी महानगरपालिका चुनावों के लिए नामांकन प्रक्रिया के दौरान अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने उन नगर निकायों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है, जहां सत्तारूढ़ दलों के उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं। यह कदम विपक्षी दलों की ओर से लगाए गए दबाव और प्रलोभन के आरोपों के बाद उठाया गया है।
अधिकारियों के मुताबिक, निर्वाचन आयोग यह जांच करेगा कि क्या विपक्षी उम्मीदवारों पर नामांकन वापस लेने के लिए किसी प्रकार का दबाव डाला गया था या उन्हें किसी तरह का लालच दिया गया। इसके अलावा, यह भी देखा जाएगा कि कहीं दबावपूर्ण या गैरकानूनी तरीकों का इस्तेमाल कर निर्विरोध चुनाव की स्थिति तो नहीं बनाई गई।
महाराष्ट्र में 29 महानगरपालिकाओं के चुनाव 15 जनवरी को कराए जाएंगे, जबकि मतगणना अगले दिन होगी। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 30 दिसंबर थी। इसके बाद कुछ स्थानों पर उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचित होने से राजनीतिक विवाद तेज हो गया।
ठाणे जिले की कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका (KDMC) में भाजपा के पांच और शिवसेना के चार उम्मीदवारों के खिलाफ कोई प्रतिद्वंद्वी मैदान में नहीं था। इसी तरह पुणे जिले की पिंपरी-चिंचवड़, जलगांव और छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिकाओं में भी कम से कम एक भाजपा उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हुआ है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि एसईसी ने संबंधित वार्डों के निर्वाचन अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है और रिपोर्ट प्रस्तुत होने तक निर्विरोध चुने गए उम्मीदवारों की आधिकारिक घोषणा नहीं की जाएगी। आयोग उन नौ वार्डों की विशेष रूप से जांच करेगा, जहां निर्विरोध चुनाव हुए हैं।
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अधिकारियों के अनुसार, कांग्रेस, जनता दल (सेक्युलर) और आम आदमी पार्टी के उम्मीदवारों ने आरोप लगाया है कि मुंबई के कोलाबा इलाके के तीन वार्डों में उन पर दबाव डालकर नामांकन दाखिल करने से रोका गया।
एसईसी को तीन जनवरी को नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि के बाद पूरी रिपोर्ट मिलने की उम्मीद है। इसके बाद संबंधित नगर निकायों के निर्वाचन अधिकारियों, नगर आयुक्तों (चुनाव प्रभारी) और पुलिस आयुक्तों से भी विस्तृत रिपोर्ट मांगी जाएगी।