लॉरेंस बिश्नोई Vs प्रताप सरनाईक (सौ. सोशल मीडिया )
Lawrence Bishnoi Threat RTO Officer Case: कुख्यात गैंगस्टर Lawrence Bishnoi गैंग अभी तक फिल्मी हस्तियों को डरा-धमका रहा था, अब वह मराठी बनाम गैर-मराठी विवाद में भी कूद गया है।
गिरोह के लोगों ने ऑटो रिक्शा टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य करने के प्रस्ताव को लेकर एक आरटीओ अधिकारी को धमकी दी है।
इधर परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा है कि महाराष्ट्र में अगर कोई बिजनेस करना चाहता है, तो उसे मराठी आनी चाहिए, इससे मराठी बनाम गैर-मराठी का मुद्दा फिर गरमाने के आसार हैं। ऑटो-टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्यता के मुद्दे में Lawrence Bishnoi Gang का नाम जुड़ने से सियासी और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है।
साथ कानून व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। बीते रविवार को मीरा-भाईंदर क्षेत्र में उप प्रादेशिक आरटीओ अधिकारी प्रसाद नलावडे को एक धमकी भरा फोन आया। यह धमकी ऑटो रिक्शा से संबंधित दस्तावेजों की जांच और मराठी अनिवार्यता के विरोध में दी गई बताई जा रही है।
आरटीओ विभाग ने काशीगांव पुलिस स्टेशन में एनसीआर दर्ज कराई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। पुलिस उपायुक्त राहुल चव्हाण के अनुसार बिश्नोई गैंग के नाम से आई धमकी कर्नाटक से दी गई थी। आगे की जांच के लिए मामला कर्नाटक पुलिस को सौंपा जाएगा।
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक ने सोमवार को कहा कि यह कदम राज्य की सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने के लिए है। जो लोग महाराष्ट्र में किसी तरह का कारोबार करना चाहते हैं, तो उन्हें मराठी आनी चाहिए, यह राज्य की संस्कृति का हिस्सा है।
ओला, उबर और रैपिडो जैसी ऐप-बेस्ड सर्विस के कई ड्राइवर हिंदी बोलने वाले बैकग्राउंड से आते हैं। कई ड्राइवर टैक्सी- ऑटो-रिक्शा चलाने के लिए परमिट लेते हैं। ऐसे ड्राइवरों को काम करने के लिए वैलिड लाइसेंस और बैज लेना जरूरी है। राज्य सरकार ने तय किया है कि जो कोई भी महाराष्ट्र में बिजनेस करना चाहता है, उसे मराठी आनी और समझनी होगी।
यह तो गलत है। भारत में एकजुटता है। इसे भाषा के नाम पर बांटना ठीक नहीं है। अगर कोई महाराष्ट्र का व्यक्ति केंद्र सरकार के लिए काम करता है तो वह किसी भी राज्य में नौकरी करेगा। लेकिन क्या वह हर राज्य की भाषा सीखेगा ? मराठी भाषा सीखना चाहिए, लेकिन अचानक से सरकार द्वारा लोगों पर थोप देना, बिल्कुल उचित नहीं है।
– अजय शुक्ला, टैक्सी चालक
हम मराठी भाषा का सम्मान करते हैं। लेकिन इसे जबरन थोपना ठीक नहीं है। भाषा विवाद से आपसी वैमनस्व पैदा होगा। दस्तावेजों की जांच के लिए मराठी में परीक्षा की अनिवार्यता उचित नहीं है। वर्षों से ड्राइवरी कर जीवन-यापन कर रहे लोग क्या इस काम को भी छोड़ दे?
– वसीम खान, ऑटो रिक्शा ड्राइवर
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा था कि टैक्सी ऑटो चालकों के लिए मराठी भाषा जानना अनिवार्य है। उन्होंने फर्जी दस्तावेजों की जांच के निर्देश दिए थे। उन्होंने संकेत दिए थे कि नियमों का उल्लंघन करने पर परमिट रद्द किए जा सकते हैं। विपक्षी दलों और विभिन्न संगठनों का कहना है कि इससे गैर-मराठी भाषी चालकों के रोजगार पर असर पड़ेगा और सामाजिक विभाजन बढ़ सकता है।
मीरा रोड-भाईंदर क्षेत्र में, ट्रांसपोर्ट अधिकारियों ने 12 हजार से ज्यादा ऑटो-रिक्शा और टैक्सी परमिट होल्डर्स को कवर करते हुए एक बड़ी जांच शुरू की है। यह जांच 1 मई तक चलेगी।
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अधिकारियों के अनुसार इस प्रक्रिया में ड्राइवरों को न केवल वैध दस्तावेज दिखाने होते हैं, बल्कि मराठी में बेसिक जानकारी भी साबित करनी होती है। आरटीओ में भाषा पढ़ने और लिखने की क्षमता का टेस्ट लिया जा रहा है।