उद्धव ठाकरे (सौ. सोशल मीडिया )
Maharashtra Leader of Opposition Crisis 2026: महाराष्ट्र विधानमंडल के दोनों सदनों (विधानसभा व विधान परिषद) में विपक्ष के नेता (एलओपी) पद पर फिलहाल कोई भी विराजमान नहीं है।
पर्याप्त बहुमत न होने की वजह से नेता विपक्ष नियुक्त करने के लिए महाविकास आघाड़ी के नेताओं को स्पीकार के सामने जाकर मिन्नत करनी पड़ रही है।
सोमवार को यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने अपने साथी नेताओं के साथ एलओपी की नियुक्ति को लेकर विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर से मुलाक़ात की। सूत्रों के मुताबिक़ नार्वेकर ने एक बार फिर सिर्फ उद्धव को वादों का का झुनझुना पकड़ा कर वापस भेज दिया है।
महाराष्ट्रासारख्या राज्याला विरोधीपक्षनेत्याची निवड २०२४ च्या हिवाळी अधिवेशनात होणं अपेक्षित असताना अद्याप नियुक्ती करण्यात आलेली नाही, ह्याबाबत आज पक्षप्रमुख मा. श्री. उद्धवसाहेब ठाकरे ह्यांनी विधानसभेचे अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ह्यांची भेट घेऊन स्मरणपत्र दिले. ह्यावेळी शिवसेना… pic.twitter.com/5pJRUcA9rq — ShivSena – शिवसेना Uddhav Balasaheb Thackeray (@ShivSenaUBT_) March 16, 2026
साल 2024 के विधानसभा चुनाव में विपक्ष की महाविकास आघाड़ी को लाडली बहना योजना के इम्पैक्ट की वजह से करारी हार का सामना करना पड़ा था। विधायकों की संख्या इतनी कम हैं कि महाविकास आघाड़ी अपने दम पर इस पद को क्लेम नहीं कर सकती है। यही वजह है कि अब उनके नेताओं को स्पीकर के दरबार में हाजिरी लगानी पड़ रही है।
उद्धव ठाकरे अपने पुत्र आदित्य ठाकरे को विधानसभा में नेता विपक्ष पद दिलाने का जुगाड़ लगा रहे हैं। यही वजह है कि उन्होंने हाल के राज्यसभा चुनाव में राकां अध्यक्ष शरद पवार का समर्थन किया था। मविआ के अंदर ऐसी डील हुई है कि विधानसभा में नेता विपक्ष पद उद्धव ठाकरे की पार्टी के पास होगा, जबकि विधान परिषद में यह पद कांग्रेस को दिया जाएगा।
विधान परिषद में काग्रेस सतेज बंटी पाटिल को नेता विपक्ष बनाना चाहती है लेकिन महायुति सरकार के मुखिया इसमें रोड़ा अटका दिया है, इस वजह से दोनों सदनों में महाविकास आघाड़ी एलओपी के लिए संघर्ष कर रही है।
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हालांकि यह देखना दिलचस्प होगा कि विधानसभा में राकां शरद पवार गुट के सीनियर नेता जयंत पाटिल, कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार व नाना पटोले, आदित्य को नेता विपक्ष के तौर पर स्वीकार करेंगे की नहीं। संख्या बल के हिसाब से विधानसभा में महाविकास आघाड़ी के अंदर उद्धव ठाकरे की पार्टी के पास सबसे ज्यादा 20 विधायक है।