Kanjurmarg Dumping Ground Pollution: दुर्गंध और प्रदूषण पर सख्ती, शिंदे ने कांजुरमार्ग के लिए दिए बड़े निर्देश
Kanjurmarg Dumping Ground से फैल रही दुर्गंध और प्रदूषण पर हाई कोर्ट की फटकार के बाद सरकार सक्रिय हो गई है। एकनाथ शिंदे ने समस्या के समाधान के लिए त्वरित और ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
- Written By: अपूर्वा नायक
कांजुरमार्ग डंपिंग ग्राउंड (सौ. सोशल मीडिया )
Kanjurmarg Dumping Ground Pollution: कांजुरमार्ग डंपिंग ग्राउंड के कचरे से निकलने वाली दुर्गंध के कारण आस-पास के इलाकों में फैलने वाले प्रदूषण को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट की फटकार के बाद राज्य सरकार एक्शन मोड में आ गई है।
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने संबंधित अधिकारियों को कोर्ट के निर्देशानुसार आवश्यक कदम उठाने के साथ ही समस्या से निपटने के लिए कारगर योजना बनाने के निर्देश दिए हैं।
साथ ही हिदायत दी गई है कि यहां प्रस्तावित बिजली परियोजना के लिए फौरन कार्यवाही की जाए। बॉम्बे हाई कोर्ट ने हाल ही में कांजुरमार्ग डंपिंग ग्राउंड क्षेत्र में प्रदूषण व स्वास्थ्य जोखिम को लेकर ‘ढीला-ढाला’ रवैया अपनाने के लिए राज्य सरकार और बीएमसी को फटकार लगाई थी।
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बांस के जंगल लगाने के निर्देश
- डीसीएम शिंदे ने बुधवार को मंत्रालय में मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल सहित संबंधित अधिकारियों की बैठक बुलाई थी।
- शिंदे ने कहा कि डंपिंग ग्राउंड इलाके के लोगों को होने वाली परेशानी और दुर्गंध रोकने के तरीके को अच्छे से लागू किए जाए।
- कचरा डिपो में बड़े पैमाने पर बांस लगाए जाए। कचरे का प्रोसेस रिहायशी इलाकों से दूर किया जाए।
- इस बारे में हाई कोर्ट के निर्देशों का पालन किया जाना चाहिए।
हर दिन की जाती है करीब 6,200 टन कचरे की प्रक्रिया
कोर्ट ने कचरा फेंकने के स्थल को बंद करने का आदेश देने की भी चेतावनी दी है। डंपिंग ग्राउंड के आसपास रहने वाले लोगों ने प्रदूषण, लगातार दुर्गंध, गैस उत्सर्जन और स्वास्थ्य जोखिम को लेकर चिंता जताई है। कचरा स्थल से निकलने वाली मीथेन गैस कार्बन डाई ऑक्साइड से अधिक हानिकारक है।
गैस उत्सर्जन के दुष्परिणामों से लोगों में भय का माहौल है। वैज्ञानिकों ने इस समस्या के निदान के लिए वैज्ञानिक उपाय अपनाने का सुझाव दिए हैं। दशकों से अपनाए जा रहे अस्थायी उपाय से कोई हल नहीं निकल सका है। कांजुरमार्ग में मनपा के कचरा प्रोजेक्ट में हर दिन करीब 6,200 टन कचरे की प्रक्रिया की जाती है। यह काम तीन तरीकों से किया जाता है। कचरे को जमीन में भंडारण करना, कम्पोस्ट बनाना और कचरे को अलग करना।
समुद्री जीवों को भी गंभीर खतरा
- अब तक करीब 190 लाख मीट्रिक टन कचरे का प्रोसेस किया जा चुका है। कांजुरमार्ग के मैंग्रोव वनों के भीतर 140 हेक्टेयर की सीमा दीवार के अंदर 65 हेक्टेयर भूमि पर एक कचरा डंपिंग ग्राउंड बना हुआ है।
- भूमि को मलबे, पत्थरों और मिट्टी का उपयोग करके लगभग दो मीटर ऊंचा उठाया गया है। कचरे से निकलने वाला रिसाव आसपास के मैंग्रोव वनों में फैलता है और लुप्तप्राय समुद्री जीवों को भी गंभीर खतरा पैदा कर रहा है।
- लगातार दुर्गंध से आसपास के लोग प्रभावित हो रहे हैं। डंपिंग ग्राउंड के लिए जारी सभी पर्यावरणीय स्वीकृतियों को चुनौती देते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट में मामला दायर किया गया है।
बदबू से निपटने बायोलॉजिकल सॉल्यूशन स्प्रे जैसे उपाय
उपमुख्यमंत्री बताया कि इलाके में बदबू को रोकने के लिए बायोलॉजिकल सॉल्यूशन का स्प्रे करना, मिट्टी बिछाना, लैंडफिल गैस मैनेजमेंट सिस्टम लागू करना और मिस्टिंग प्रोसेस जैसे उपाय किए जा रहे हैं। एंटी-ओडर स्प्रे अच्छे से किया जाना चाहिए। इस इलाके में बड़े पैमाने पर बांस लगाए जाने चाहिए और बांस का घना जंगल बनाया जाना चाहिए ताकि इसका इस्तेमाल बदबू को रोकने के लिए किया जा सके।
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फर्टिलाइजर प्रक्रिया से सावधानी
बैठक में फैसला लिया गया कि बीएमसी को वेस्ट टू एनर्जी जैसे लंबे समय के सॉल्यूशन प्रोजेक्ट के लिए जरूरी टेक्निकल पहलुओं की जांच करके इस प्रोजेक्ट को तुरंत शुरू करने के लिए कदम उठाए जाएंगे, जहां रिहायशी इलाके कचरा डिपो के पास हैं, वहां फर्टिलाइजर व आरडीएफ जैसी बदबूदार प्रक्रिया नहीं की जानी चाहिए। उन्हें 500 मीटर से ज्यादा दूर के इलाकों में किया जाना चाहिए, ताकि लोगों को दुर्गंध से परेशानी न हो।
