महाराष्ट्र विधान भवन (सोर्स: सोशल मीडिया)
Acid Attack Women Safety Law: महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार ने महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। बुधवार को महाराष्ट्र विधान परिषद ने सर्वसम्मति से भारतीय न्याय संहिता (महाराष्ट्र संशोधन) विधेयक 2026 को पारित कर दिया। यह विधेयक बहुचर्चित ‘शक्ति कानून’ के उन कड़े प्रावधानों को कानूनी जामा पहनाता है, जिनका उद्देश्य अपराधियों के मन में खौफ पैदा करना और पीड़िताओं को सम्मानजनक जीवन देना है।
सदन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री और गृह मंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बताया कि मूल शक्ति विधेयक 2020 में विधानसभा द्वारा पारित किया गया था। हालांकि, जब इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा गया, तो केंद्र सरकार द्वारा भारतीय न्याय संहिता (BNS) को लागू करने की प्रक्रिया चल रही थी। केंद्र ने राज्य से पूछा कि क्या नए केंद्रीय कानूनों (BNS) के आने के बाद भी इन संशोधनों की आवश्यकता है। एक विशेष समिति के आकलन के बाद, राज्य सरकार ने BNS में ही महाराष्ट्र-विशिष्ट संशोधनों को शामिल करने का निर्णय लिया।
पीड़िताओं की पहचान की सुरक्षा: तेजाब हमले (Acid Attack) का सामना करने वाली महिलाओं की निजता को सुरक्षित रखने के लिए अब उनके नाम और पहचान को उजागर करना अपराध माना जाएगा। इससे पीड़िताओं को सामाजिक कलंक से बचने और कानूनी लड़ाई निडर होकर लड़ने में मदद मिलेगी।
डिजिटल सुरक्षा और जेल: बदलते समय के साथ ऑनलाइन अपराध बढ़े हैं। नए संशोधन के तहत, ईमेल या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न करना अब सीधे तौर पर दंडनीय अपराध होगा। इस अपराध के लिए 3 साल तक की कैद और भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
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मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया कि यद्यपि केंद्रीय कानून (BNS) जुलाई 2024 से प्रभावी हो गया है, लेकिन महाराष्ट्र सरकार महिलाओं के खिलाफ अपराधों के लिए और भी कठोर दंड सुनिश्चित करना चाहती थी। विधानसभा में पहले ही पारित हो चुके इस बिल को अब परिषद की भी मुहर मिल गई है, जिससे यह स्पष्ट है कि राज्य में महिला सुरक्षा सर्वोपरि है। यह विधेयक न केवल अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करेगा, बल्कि डिजिटल युग में महिलाओं को एक सुरक्षित वातावरण प्रदान करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।