'अजित पवार के निधन के बाद NCP पर कब्जा करना चाहते थे प्रफुल पटेल और तटकरे', रोहित पवार का सनसनीखेज आराेप

NCP Power Struggle: रोहित पवार ने अजित पवार की विमान हादसे को 'सुनियोजित साजिश' बताते हुए प्रफुल पटेल और सुनील तटकरे पर पार्टी पर कब्जा करने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
Rohit Pawar Allegations On Praful Patel And Sunil Tatkare
रोहित पवार, सुनील तटकर व प्रफुल पटेल (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Rohit Pawar Allegations On Praful Patel And Sunil Tatkare: महाराष्ट्र की राजनीति में उस समय भूचाल आ गया जब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद चंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार की मृत्यु को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे किए। रोहित पवार ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि अजित पवार की विमान दुर्घटना महज एक हादसा नहीं, बल्कि पार्टी पर नियंत्रण हासिल करने के लिए रची गई एक "पूर्व नियोजित योजना" का हिस्सा हो सकती है।

प्रफुल पटेल और सुनील तटकरे ने निर्वाचन आयोग को लिखा था पत्र

रोहित पवार ने दस्तावेजों का हवाला देते हुए दावा किया कि अजित पवार के निधन के मात्र 18 दिनों के भीतर, पार्टी के वरिष्ठ नेताओं प्रफुल पटेल और सुनील तटकरे ने निर्वाचन आयोग (EC) को पत्र लिखकर गुमराह करने की कोशिश की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि 16 फरवरी को लिखे गए इन पत्रों में झूठा दावा किया गया कि एनसीपी के संविधान में संशोधन किया गया है, जिसका उद्देश्य कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल पटेल को पार्टी की सभी व्यापक शक्तियां सौंपना था।

पवार परिवार को अंधेरे में रखा गया

रोहित पवार के अनुसार, इन पत्रों में स्पष्ट कहा गया था कि राष्ट्रीय अध्यक्ष की अनुपस्थिति में सभी निर्णय लेने का अधिकार कार्यकारी अध्यक्ष के पास होगा। चौंकाने वाली बात यह है कि अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार और उनके बड़े बेटे पार्थ पवार को इस पत्राचार के बारे में पूरी तरह अंधेरे में रखा गया था। रोहित पवार के अनुसार जब सुनेत्रा पवार ने 26 फरवरी को राष्ट्रीय अध्यक्ष का पदभार संभाला, तब उन्हें इस साजिश का पता चला और उन्होंने तुरंत चुनाव आयोग को पत्र लिखकर 28 जनवरी से उनके कार्यभार संभालने तक के सभी पत्राचार को नजरअंदाज करने का अनुरोध किया।

क्या था पत्र में?

विधायक रोहित पवार ने 10 मार्च और 26 फरवरी की तारीख वाले दस्तावेजों का हवाला दिया, जिन पर कथित तौर पर पटेल और तटकरे के हस्ताक्षर हैं और जिन्हें निर्वाचन आयोग को प्रस्तुत किया गया था। रोहित ने आरोप लगाया कि इन दस्तावेजों में कहा गया है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष की अनुपस्थिति में, सभी अधिकार राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष के पास होंगे और सभी निर्णय उन्हीं द्वारा लिए जाएंगे। उन्होंने दावा किया, इस पत्र ने प्रभावी रूप से सभी शक्तियां कार्यकारी अध्यक्ष के पास केंद्रित कर दीं। रोहित ने कहा कि सुनेत्रा पवार ने बाद में निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर कहा कि जब तक वह औपचारिक रूप से राष्ट्रीय अध्यक्ष का पदभार ग्रहण नहीं कर लेतीं, तब तक ऐसे किसी भी अंतरिम पत्र व्यवहार को नजरअंदाज किया जाना चाहिए।

रोहित पवार ने विमान हादसे पर उठाए सवाल

रोहित पवार ने 28 जनवरी को पुणे के बारामती के पास हुए उस लीयरजेट 45 विमान दुर्घटना पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं जिसमें अजित पवार और चार अन्य की जान चली गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि दुर्घटनाग्रस्त विमान का संचालन करने वाली वीएसआर कंपनी को बचाने की कोशिशें की जा रही हैं।

विधायक का दावा है कि हादसे के बाद भी इस कंपनी को सरकारी सेवाओं के बदले 80 से 90 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। उन्होंने यह भी बताया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी की सलाह पर इस मामले में कर्नाटक के बेंगलुरु में 'जीरो एफआईआर' दर्ज कराई गई है, ताकि निष्पक्ष जांच हो सके। रोहित पवार ने सवाल उठाया कि विधानसभा सत्र के दौरान इस मुद्दे पर चर्चा न करने के निर्देश किसने दिए थे और अधिकांश विधायक इस संवेदनशील विषय पर चुप क्यों रहे?

काला जादू और संदिग्ध अनुष्ठान

इस पूरे प्रकरण में सबसे सनसनीखेज मोड़ तब आया जब रोहित पवार ने अंधविश्वास और 'काले जादू' का जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि अजित पवार की मृत्यु से पहले उनके आवास के बाहर "काला जादू" या संदिग्ध अनुष्ठान करने के प्रयास किए गए थे। उन्होंने इस गतिविधि में नाशिक के एक स्वयंभू बाबा का हाथ होने की आशंका जताई और पूछा कि क्या इन अनुष्ठानों का संबंध उस बड़ी साजिश से था जिसने अंततः एक बड़े नेता की जान ले ली?

सत्ता के संघर्ष में केंद्रीय मंत्रियों की भूमिका?

रोहित पवार ने केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के बयानों को भी "संदिग्ध" बताया। गोयल ने पहले प्रफुल पटेल के अध्यक्ष बनने की घोषणा की थी और बाद में उसे 'गलत जानकारी' करार दिया। रोहित पवार ने आरोप लगाया कि प्रफुल पटेल, सुनील तटकरे और कुछ भाजपा नेताओं ने मिलकर अजित पवार के छोटे बेटे जय पवार द्वारा प्रस्तावित संवाददाता सम्मेलन को रोकने के लिए भारी दबाव डाला था। विधायक ने अंत में एक बड़ा सवाल छोड़ते हुए आपराधिक जांच की मांग की: "क्या 28 जनवरी की घटना वास्तव में एक दुर्घटना थी या कुछ और अधिक गंभीर?"

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