लाडकी बहिन योजना (सोर्स: सोशल मीडिया)
Ladki Bahin Yojana Installment Update: मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना ने महाराष्ट्र में महिला सशक्तिकरण की एक नई लहर पैदा की है। इस योजना के माध्यम से लाखों महिलाएं हर महीने 1500 रुपये की आर्थिक सहायता प्राप्त कर आत्मनिर्भर बन रही हैं। लेकिन, पिछले कुछ समय से हजारों लाभार्थियों के बैंक खातों में किस्तें नहीं पहुंच पा रही हैं, जिससे महिलाओं में असमंजस और नाराजगी की स्थिति बनी हुई है।
इसी बीच, महाराष्ट्र सरकार ने उन महिलाओं को बड़ी राहत दी है जिनकी लाडकी बहिन योजना की किस्तें तकनीकी कारणों या अधूरी प्रक्रिया की वजह से रुकी हुई थीं। सरकार ने ई-केवाईसी (e-KYC) पूरी करने की अंतिम तिथि को बढ़ाकर 31 मार्च कर दिया है।
महिला एवं बाल विकास विभाग के नए स्पष्टीकरण के अनुसार, भुगतान न होने का सबसे बड़ा कारण लाभार्थियों की e-KYC प्रक्रिया का अधूरा होना है। ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट की कमी, आधार कार्ड का बैंक खाते से लिंक न होना और मोबाइल पर ओटीपी (OTP) न आने जैसी तकनीकी बाधाओं ने इस प्रक्रिया को चुनौतीपूर्ण बना दिया है। विभाग ने साफ किया है कि जब तक तकनीकी खामियां दूर नहीं होतीं, तब तक पैसा ट्रांसफर करना संभव नहीं है।
लाडकी बहिन योजना की लाभार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण जानकारी यह है कि केवल e-KYC पोर्टल पर अपडेट कर देना ही काफी नहीं होगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि केवाईसी प्रक्रिया पूरी होने के बाद सभी आवेदनों की दोबारा गहन जांच (Re-verification) की जाएगी। प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि योजना का लाभ केवल उन्हीं महिलाओं को मिले जो इसके लिए पूरी तरह पात्र हैं। इस दोबारा जांच की प्रक्रिया के कारण ही भुगतान में समय लग रहा है।
विभाग से प्राप्त संकेतों के अनुसार, जिन महिलाओं की किस्तें अटकी हुई हैं, उन्हें तत्काल भुगतान मिलने की संभावना कम है। पूरी उम्मीद है कि 31 मार्च की डेडलाइन खत्म होने और वेरिफिकेशन प्रक्रिया पूरी होने के बाद, सभी लंबित किस्तों का भुगतान एकमुश्त (Lumpsum) किया जाएगा। यानी पात्र महिलाओं को उनके हक का पूरा पैसा एक साथ मिल सकता है।
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सरकार ने सभी लाभार्थियों से धैर्य बनाए रखने की अपील की है और जल्द से जल्द नजदीकी केंद्र या ऑनलाइन माध्यम से अपनी केवाईसी प्रक्रिया पूरी करने को कहा है। दूसरी ओर, इस देरी को लेकर महिला लाभार्थियों में आक्रोश भी है; उनका कहना है कि प्रक्रिया को अधिक सरल बनाया जाना चाहिए ताकि उन्हें आर्थिक मदद के लिए महीनों इंतजार न करना पड़े।