महाराष्ट्र पुलिस (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Money Laundering Maharashtra Police: महाराष्ट्र पुलिस के एक वरिष्ठ महानिरीक्षक (आईजी) स्तर के अधिकारी वर्तमान में सीबीआई की गहन जांच का सामना कर रहे हैं। जांच में सामने आया है कि अधिकारी के परिवार विशेषकर उनकी पत्नी, बेटे और बेटी के नाम पर कई शेल कंपनियां (कागजी कंपनियां) पंजीकृत हैं।
चौंकाने वाली बात यह कि इन कंपनियों के पते पर आलीशान दफ्तरों के बजाय किराना दुकानें और छोटे खुदरा स्टोर चल रहे हैं। इगतपुरी में एक अवैध कॉल सेंटर रैकेट को संरक्षण देने के आरोपों के बाद यह पूरा नेटवर्क रडार पर आया। जांचकर्ताओं ने पाया कि 2019 से 2023 के बीच स्थापित ये कंपनियां रियल एस्टेट, वित्तीय परामर्श और आतिथ्य जैसे क्षेत्रों में सक्रिय होने का दावा करती हैं।
हालांकि, जमीनी हकीकत इसके उलट है। उदाहरण के लिए, ठाणे और भिवंडी में पंजीकृत फर्मों के पते पर किराना दुकाने मिली, जबकि एक अन्य कंपनी का पता चार्टर्ड अकाउंटेंट के ऑफिस के रूप में दर्ज था। न्यूनतम पूंजी और शून्य व्यावसायिक गतिविधियों वाली ये संस्थाएं मनी लॉन्ड्रिग के संदिग्ध पैटर्न को दर्शाती हैं।
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अशोक खरात मामले से जुड़े इस विवाद में अब साइबर धोखाधड़ी से प्राप्त धन के हेरफेर की जांच की जा रही है। एजेंसियों का मानना है कि इन संस्थाओं का इस्तेमाल केवल दस्तावेजीकरण और अवैध धन को वैध बनाने के लिए किया गया था। सार्वजनिक रिकॉर्ड में इन कंपनियों के टर्नओवर या किसी भी ठोस प्रोजेक्ट की जानकारी न होना इस संदेह को और पुख्ता करता है।