मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (सोर्स: सोशल मीडिया)
Maharashtra Government Allotted Land MMRDA: भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई और उसके आसपास के क्षेत्रों (MMR) के बुनियादी ढांचे को एक वैश्विक पहचान देने की दिशा में महाराष्ट्र सरकार ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। राज्य सरकार ने मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी (MMRDA) को रिकॉर्ड 33,954 हेक्टेयर (लगभग 83,904 एकड़) सरकारी जमीन हस्तांतरित करने की मंजूरी दे दी है। इस विशाल भूमि बैंक के हस्तांतरण का मुख्य उद्देश्य मुंबई और उसके उपनगरों में चल रहे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को गति देना और भविष्य की परियोजनाओं के लिए आवश्यक धन जुटाना है।
महाराष्ट्र सरकार द्वारा जारी किए गए संकल्प (GR) के अनुसार, यह जमीन एमएमआर क्षेत्र के 1,324 गांवों में फैली हुई है। इसमें ठाणे, अंबरनाथ, भिवंडी, कल्याण, अलीबाग, पनवेल, पालघर और वसई जैसे प्रमुख इलाके शामिल हैं। इन क्षेत्रों में जमीन उपलब्ध होने से अब नए ग्रोथ सेंटर, लॉजिस्टिक्स पार्क और ट्रांसपोर्ट नेटवर्क का जाल बिछाना आसान हो जाएगा।
इस रणनीतिक कदम के साथ ही, एमएमआरडीए ने वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए अपने प्रोजेक्ट पाइपलाइन का ‘वित्तीय क्लोजर’ हासिल कर लिया है। वर्तमान में एमएमआरडीए 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं पर काम कर रहा है। इसमें 300 किलोमीटर से अधिक का मेट्रो नेटवर्क, मल्टी-मॉडल कॉरिडोर और अर्बन टनल शामिल हैं। अब तक इन प्रोजेक्ट्स के लिए कर्ज या बजटीय सहायता पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब एमएमआरडीए इस जमीन का मुद्रीकरण (monetization) करके खुद पूंजी जुटा सकेगा।
एमएमआरडीए, नीति आयोग के साथ मिलकर एमएमआर को दुनिया के सबसे गतिशील शहरी विकास इंजनों में से एक बनाने की योजना पर काम कर रहा है। इसे ‘मुंबई 3.0’ विजन का नाम दिया गया है, जिसके तहत भविष्य के आर्थिक पावरहाउस, ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) और टिकाऊ शहरी विस्तार पर जोर दिया जा रहा है। सरकारी अधिकारियों के अनुसार, यह जमीन हस्तांतरण जरूरत के आधार पर होगा, न कि एकमुश्त।
सरकार ने इस हस्तांतरण के साथ कुछ कड़ी शर्तें भी रखी हैं। एमएमआरडीए को इन सभी जमीनों का स्वतंत्र डिजिटल रिकॉर्ड बनाए रखना होगा। यदि हस्तांतरित भूमि में वन क्षेत्र, चराई भूमि या धार्मिक स्थल शामिल हैं, तो प्राधिकरण को सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के निर्देशों का कड़ाई से पालन करना होगा। इसके अलावा, स्थानीय निकायों जैसे ग्राम पंचायतों या जिला परिषदों की भूमि के विकास से पहले उनकी अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
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एक महत्वपूर्ण वित्तीय प्रावधान यह है कि इन जमीनों के विकास से होने वाली कुल आय का 25% हिस्सा एमएमआरडीए को राज्य सरकार के साथ साझा करना होगा। इससे सार्वजनिक वित्त के लिए आय का एक निरंतर स्रोत बनेगा।
जिला कलेक्टरों को निर्देश दिया गया है कि वे जमीन सौंपने से पहले अतिक्रमण हटाना सुनिश्चित करें और यह जिम्मेदारी एमएमआरडीए की होगी कि वहां दोबारा अतिक्रमण न हो। यह फैसला मुंबई को एक ग्लोबल इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।