महाराष्ट्र में सड़क निर्माण के नाम पर 297 करोड़ की बर्बादी! CAG रिपोर्ट में हाइवे प्रोजेक्ट्स पर बड़ा खुलासा

CAG Report Maharashtra: महाराष्ट्र की सड़क परियोजनाओं में CAG ने 297.97 करोड़ के फिजूलखर्च पर गंभीर सवाल उठाए हैं। ऑडिट रिपोर्ट में डीपीआर में गड़बड़ी और अनावश्यक भुगतान की बात सामने आई है।
CAG Raises Questions Unnecessary Expenditure of 297 Crore on Road Projects in Maharashtra
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) (सोर्स: सोशल मीडिया)
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CAG Report On Maharashtra Road Projects: महाराष्ट्र में बुनियादी ढांचे के विकास के दावों के बीच एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने राज्य विधानसभा में पेश अपनी हालिया रिपोर्ट में 'हाइब्रिड एन्यूइटी मॉडल' (HAM) के तहत चल रही सड़क परियोजनाओं में ₹297.97 करोड़ के अनावश्यक खर्च पर कड़ा ऐतराज जताया है।

क्या है पूरा मामला?

कैग ने वर्ष 2018-19 से 2022-23 के बीच राज्य में हुए सड़क सुधार कार्यों का विस्तृत ऑडिट किया। रिपोर्ट में बताया गया कि सड़क निर्माण के लिए तैयार की गई विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) में भारी खामियां थीं। तकनीकी रूप से सड़क की जितनी मोटाई की आवश्यकता थी, उससे कहीं अधिक मोटाई का प्रावधान किया गया। यातायात के वास्तविक अनुमान (Million Standard Axles) की अनदेखी कर सड़कों को जरूरत से ज्यादा मोटा बनाया गया, जिससे सरकारी खजाने पर 297.97 करोड़ का अतिरिक्त और बेवजह बोझ पड़ा।

कागजों पर हुआ भूमि अधिग्रहण और करोड़ों का खेल

ऑडिट में यह भी पाया गया कि उन भूमि अधिग्रहण गतिविधियों के लिए भी 5.55 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया, जो वास्तव में कभी हुई ही नहीं। इसके अलावा, प्रशासनिक ढिलाई का खामियाजा भी जनता के पैसे से भुगता गया। राज्य सरकार द्वारा समय पर फंड जारी न करने के कारण ठेकेदारों को किस्तों का भुगतान देरी से हुआ, जिसके चलते सरकार को 4.65 करोड़ रुपए का अतिरिक्त ब्याज देना पड़ा।

बीमा और रखरखाव में भी सेटिंग की आशंका

CAG की रिपोर्ट ने रखरखाव के खर्चों पर भी सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, सड़क के रखरखाव के नाम पर बीमा शुल्क को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया। असल में प्रीमियम कम होने के बावजूद कागजों में ज्यादा राशि दिखाई गई, जिससे 34.56 करोड़ रुपए का अतिरिक्त नुकसान हुआ। इस खुलासे के बाद अब राज्य के लोक निर्माण विभाग (PWD) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।

CAG की कड़ी सिफारिशें

इस वित्तीय अनियमितता पर लगाम लगाने के लिए कैग ने भविष्य की परियोजनाओं के लिए कुछ सख्त सिफारिशें की हैं।

  • सटीक DPR: भविष्य में प्रोजेक्ट रिपोर्ट वास्तविक आंकड़ों और तकनीकी जरूरतों के आधार पर ही बनाई जाए।
  • समय पर बजट: ब्याज के अतिरिक्त बोझ से बचने के लिए बजट का आवंटन समय पर सुनिश्चित हो।
  • मजबूत निगरानी: परियोजनाओं के रखरखाव और बीमा जैसे खर्चों की निगरानी के लिए एक पारदर्शी तंत्र विकसित किया जाए।
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