महाराष्ट्र में नर्सिंग शिक्षा का होगा बड़ा विस्तार, 10 नए BSc Nursing कॉलेज खुलेंगे, 8 GNM कॉलेज होंगे अपग्रेड
Maharashtra Medical Education: महाराष्ट्र में चिकित्सा शिक्षा मंत्री हसन मुश्रीफ ने 10 नए बीएससी नर्सिंग कॉलेज खोलने और 8 जीएनएम कॉलेजों के उन्नयन की घोषणा की। सरकारी कॉलेजों में सीटें बढ़ेंगी।
- Written By: रूपम सिंह
नर्सिंग विद्यार्थि (सोर्स-सोशल मीडिया)
Maharashtra BSc Nursing Colleges Updates: महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में कुशल नर्सिंग पेशेवरों की उपलब्धता बढ़ाने और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों को कम शुल्क पर गुणवत्तापूर्ण नर्सिंग शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए बड़ा फैसला लिया है। चिकित्सा शिक्षा मंत्री हसन मुश्रीफ ने विधानसभा में बताया कि सरकार ने नर्सिंग शिक्षा के व्यापक विस्तार की योजना को मंजूरी दी है।
8 जीएनएम कॉलेजों का होगा उन्नयन
मंत्री ने बताया कि मंत्रिमंडल के निर्णय के अनुसार मुंबई के जीटी और सेंट जॉर्ज अस्पताल, धुले, सोलापुर, अंबाजोगाई, अकोला, नागपुर (आईजीएमसी) और सांगली स्थित 8 सरकारी जीएनएम कॉलेजों का उन्नयन किया जाएगा। इन सभी संस्थानों में 100-100 सीटों की क्षमता वाले नए बीएससी नर्सिंग कॉलेज शुरू किए जाएंगे।
5 सरकारी कॉलेजों में बढ़ेगी प्रवेश क्षमता
सरकार ने मुंबई के जेजे अस्पताल, नागपुर, छत्रपति संभाजीनगर, पुणे और नांदेड़ के 5 सरकारी बीएससी नर्सिंग कॉलेजों की प्रवेश क्षमता बढ़ाकर 100 सीट करने का भी निर्णय लिया है। इससे अधिक संख्या में विद्यार्थियों को सरकारी संस्थानों में नर्सिंग शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
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10 नए बीएससी नर्सिंग कॉलेज स्थापित होंगे
राज्य सरकार चंद्रपुर, सिंधुदुर्ग, यवतमाल, अलीबाग, रत्नागिरी, अमरावती, धाराशिव, गडचिरोली, पालघर और अहिल्यानगर में 10 नए सरकारी बीएससी नर्सिंग कॉलेज स्थापित करेगी। इन नए संस्थानों के शुरू होने से राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में नर्सिंग शिक्षा की पहुंच बढ़ेगी और स्थानीय विद्यार्थियों को अपने जिले के नजदीक उच्च शिक्षा का अवसर मिलेगा।
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स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगा प्रशिक्षित मानवबल
सरकार का मानना है कि इस पहल से राज्य में प्रशिक्षित नर्सिंग पेशेवरों की संख्या बढ़ेगी और सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को आवश्यक मानव संसाधन उपलब्ध होगा। साथ ही, आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को कम शुल्क पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सकेगी। चिकित्सा शिक्षा विभाग का कहना है कि यह निर्णय भविष्य की स्वास्थ्य जरूरतों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है और इससे नर्सिंग शिक्षा के बुनियादी ढांचे को भी मजबूती मिलेगी।
