महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर व विधायक जितेंद्र आव्हाड (सोर्स: सोशल मीडिया)
Maharashtra Assembly News: देश के प्रगतिशील एवं पुरोगामी राज्य माने जाने वाले महाराष्ट्र में स्त्री भ्रूण हत्या का प्रमाण काफी बढ़ गया है। राज्य में लड़कियों की जन्मदर बढ़े इस उद्देश्य से शुरू की गई ‘लेक लाडकी’, ‘माझी कन्या भाग्यश्री’, ‘सुकन्या समृद्धि’ आदि अनेक योजनाओं के बावजूद 1 हजार पुरुषों में महिलाओं की जन्मदर 900 के नीचे तक पहुंच गई है। यह दर राष्ट्रीय स्तर से भी कम है।
बुधवार को राज्य विधानसभा में इस विषय पर लाए गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर विधायकों ने कहा कि महाराष्ट्र में गर्भलिंग निदान प्रतिबंध कानून की धज्जियां उड़ रहीं हैं। राष्ट्रीय कुटुंब आरोग्य सर्वेक्षण अभियान में राज्य के 24 जिलों में तो स्थिति ज्यादा गंभीर बताई जा रही है। एनसीपी के विधायक जितेंद्र आव्हाड, हेमंत ओगले, कांग्रेस के अमित देशमुख, रोहित पवार ने अवैध गर्भलिंग निदान और गर्भपात केंद्रों में हो रही भ्रूण हत्या पर सरकार को घेरा। बीजेपी के सदस्य प्रशांत बंग ने मांग ने कहा कि स्त्री भ्रूण हत्या करने वालों पर मर्डर का चार्ज लगाया जाना चाहिए।
विधानसभा में सदस्यों ने कहा कि गर्भलिंग निदान प्रतिबंधित कानून बनाने वाला महाराष्ट्र विश्व का पहला राज्य रहा है। इसके बावजूद राज्य में 54 हजार से ज्यादा बच्चियां गर्भ में हो मार डाली गईं। राज्य के छोटे बड़े कस्बों शहरों से लेकर ग्रामीण इलाकों में भी गर्भलिंग निदान केंद्रों के माध्यम से अवैध कार्य हो रहे हैं। यहां तक कि गाड़ियों में मशीनें ले जाकर गर्भलिंग निदान किए जाने का पता चला है। इन घटनाओं की उच्चस्तरीय जांच की मांग विधायकों ने की।
राज्य में स्त्री भ्रूण हत्या के मामले में विधायकों द्वारा उठाए गए सवाल पर स्वास्थ्य एवं कुटुंब कल्याण मंत्री प्रकाश आबिटकर ने कहा कि 2021-23 के दौरान राज्य में 1 हजार लड़को पर लड़कियों का जन्म प्रमाण 894 था लेकिन 2024 तक इसमें बढ़ोतरी हुई और 912 हो गया। इस समय जन्मलिंग गुणोत्तर प्रमाण 913 है। हालांकि 36 जिलों में से 16 जिलों में यह प्रमाण 900 से कम जबकि 8 जिलों में 900 से 1000 के बीच तथा 12 जिलों में तो 1हजार लड़कों पर 1000 से ज्यादा लड़कियों का प्रमाण है।
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इस मामले में और कठिन कानून व कार्रवाई के मामले में स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने कहा कि राज्य में गर्भलिंग निदान रोकने और कड़क कानून बनाए जाने के संदर्भ में विधि एवं न्याय विभाग से चर्चा कर कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ स्वास्थ्य विभाग की तरफ नियमित जनजागृति अभियान चलाए जा रहे हैं। सोनोग्राफी केंद्रों पर नजर रखने के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में टास्कफोर्स का गठन किया है।