भंडारा में खेती पर संकट, जलस्तर में भारी गिरावट; संसाधनों की कमी बनी चुनौती
Bhandara Summer Crops News: भंडारा में फसल क्षेत्र बढ़ा, लेकिन पानी की कमी और बिजली संकट से किसान परेशान हैं। जल भंडार 42% तक गिरने से सिंचाई पर असर पड़ा है।
- Written By: अंकिता पटेल
भंडारा खेती संकट( सोर्स: सोशल मीडिया )
Bhandara Water Crisis Farming: भंडारा जिले में इस वर्ष ग्रीष्मकालीन फसलों के क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। कुल 60,075 हेक्टेयर क्षेत्र में विभिन्न फसलों की बुवाई की गई है। हालांकि बढ़ते तापमान, घटते जलस्रोत और अनियमित बिजली आपूर्ति के कारण किसान दोहरे संकट का सामना कर रहे हैं।
जिले के 63 छोटे-बड़े जल परियोजनाओं में पानी का स्तर तेजी से घटा है और वर्तमान में केवल 42 प्रतिशत जल भंडार शेष है। पिछले वर्ष इसी समय यह आंकड़ा 88.84 प्रतिशत था।
इस भारी गिरावट ने सिंचाई को लेकर किसानों की चिंता बढ़ा दी है। कृषि विभाग के अनुसार, कुल बुआई में सबसे अधिक 56,772 हेक्टेयर में धान की खेती की गई है।
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इसके अलावा 1,476 हेक्टेयर में सब्जियां, 960 हेक्टेयर में गन्ना, 409 हेक्टेयर में चारा, 475 हेक्टेयर में मक्का, 259 हेक्टेयर में दलहन, 196 हेक्टेयर में तरबूज खरबूज, 126 हेक्टेयर में अन्य अनाज तथा 216 हेक्टेयर में तिल और सूरजमुखी जैसी फसलें बोई गई हैं।
मार्च से ही तापमान 41 डिग्री के करीब पहुंचने से जमीन की नमी तेजी से कम हो रही है। बाष्पीकरण बढ़ने के कारण फसलों को बार-बार पानी देना पड़ रहा है। खासकर धान और सब्जियों को अधिक पानी की जरूरत महसूस हो रही है।
किसानों के सामने सबसे बड़ी समस्या अनियमित बिजली आपूर्ति है। रात के समय मिलने वाली बिजली के कारण किसानों को जोखिम उठाकर सिंचाई करनी पड़ रही है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूरों की कमी के कारण खेती के काम प्रभावित हो रहे हैं।
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सिंचाई पद्धति में किया बदलाव
पानी की कमी से निपटने के लिए किसान अब ड्रिप और संप्रिंकलर सिंचाई पद्धति अपना रहे हैं। इससे पानी की बचत हो रही है, लेकिन छोटे किसानों के लिए इसका खर्च वहन करना मुश्किल साबित हो रहा है।
