बच्चों में डिजिटल लत रोकने विशेषज्ञ टास्क फोर्स गठित, दोनों सदनों के सदस्यों की समिति बनेगी
Digital Addiction Children: महाराष्ट्र सरकार ने बच्चों में बढ़ती डिजिटल लत और गेमिंग डिसऑर्डर को रोकने के लिए विशेषज्ञ टास्क फोर्स गठित करने का फैसला लिया है, जिसकी रिपोर्ट अगले सत्र तक आएगी।
- Written By: सूर्यप्रकाश मिश्र | Edited By: आंचल लोखंडे
kids mobile addiction (सोर्सः सोशल मीडिया)
Maharashtra Task Force: बच्चों में बढ़ती डिजिटल लत और उसके दुष्परिणामों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने विशेषज्ञों की एक टास्क फोर्स गठित करने का निर्णय लिया है। राज्य के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री आशिष शेलार ने विधान परिषद में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आगामी सत्र तक इस टास्क फोर्स की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी।
बुधवार को विधान परिषद सदस्य निरंजन डावखरे और संजय केणेकर ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से बच्चों में बढ़ती डिजिटल लत और उसके दुष्परिणामों का मुद्दा उठाया। चर्चा में विधायक प्रवीण दरेकर, चित्रा वाघ, भाई जगताप और उमा खापरे सहित अन्य सदस्यों ने भी भाग लिया।
विधान परिषद में मंत्री शेलार की जानकारी
चर्चा के दौरान किशोरों और कम उम्र के बच्चों में सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग की बढ़ती लत पर चिंता व्यक्त की गई। गेमिंग ऐप्स और बच्चों के लिए सोशल मीडिया उपयोग की आयु-सीमा निर्धारित करने तथा नाबालिगों को लक्षित डिजिटल विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगाने संबंधी प्रश्न भी उठाए गए। इसका उत्तर देते हुए मंत्री शेलार ने बताया कि 2 फरवरी 2026 को सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के प्रधान सचिव वीरेंद्र सिंह को विशेषज्ञों की टास्क फोर्स गठित करने के लिखित निर्देश दिए गए हैं।
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विधानपरिषद सदस्या चित्राताई वाघ यांनी डिजिटल बाल सुरक्षा धोरणासंदर्भात प्रश्न उपस्थित केला, तसेच डिजिटल गेम्स आणि ऍप्सचा दुरुपयोग दशहवादी आणि अन्य देश विघातक गोष्टींसाठी होतो का? असा प्रश्न उपस्थित केला, त्याला उत्तर दिले. खरं तर डिजिटल बाल सुरक्षा धोरण यासाठीच हा टास्कफोर्स… pic.twitter.com/Q7feRGpdGz — Adv. Ashish Shelar – ॲड. आशिष शेलार (@ShelarAshish) February 25, 2026
4 करोड़ बच्चों पर असर
शेलार ने कहा कि 18 वर्ष से कम आयु के लगभग चार करोड़ बच्चे हैं, जिनमें से लगभग तीन करोड़ बच्चे 15 वर्ष से कम आयु के हैं। उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य का प्रश्न अत्यंत गंभीर है। सरकार इस विषय को गंभीरता से ले रही है। इस मुद्दे पर दोनों सदनों के सदस्यों की एक समिति भी गठित की जाएगी।
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शेलार ने बताया कि टास्क फोर्स में बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण, मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव, डिजिटल प्लेटफॉर्म का संतुलित एवं जिम्मेदार उपयोग, शिक्षा और समग्र विकास पर प्रभाव तथा बच्चों की डिजिटल सुरक्षा से संबंधित राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय ढांचे की समीक्षा की जाएगी। मंत्री शेलार ने ‘रिस्पॉन्सिबल नेटिज़्म’ संस्था के अध्ययन का उल्लेख करते हुए बताया कि वैश्विक गेमिंग बाजार 200 अरब डॉलर से अधिक का हो चुका है। मोबाइल गेम डाउनलोड के मामले में भारत विश्व में पहले स्थान पर है। महाराष्ट्र में स्मार्टफोन उपयोग में वृद्धि के कारण वर्ष 2027 तक यह घरेलू उद्योग 8.6 अरब डॉलर तक पहुंचने की संभावना है।
बढ़े ‘गेमिंग डिसऑर्डर’ के मामले
एक अध्ययन के अनुसार, महाराष्ट्र के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों में ‘गेमिंग डिसऑर्डर’ के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। राज्य के पांच केंद्रों में आने वाले मामलों में हर 10 में से 3 मामले गेमिंग लत से जुड़े हैं। विभिन्न विद्यालयों में किए गए इंटरनेट डिपेंडेंसी स्केल सर्वे में 40 प्रतिशत बच्चों में मध्यम से गंभीर स्तर की गेमिंग लत पाई गई है।
