प्रतीकात्मक तस्वीर (AI Generated)
Mumbai Cyber Fraud Report News: मुंबई में साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। साल 2020 से अब तक करीब 20,000 से अधिक मामले दर्ज हो चुके हैं। जिनमें लोगों को कुल 2,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का गवां चुके है। लेकिन इस राशि की रिकवरी ठगी की रकम के मुकाबले बेहद कम हो रही है। हालांकि मुंबई साइबर पुलिस जालसाजों को पकड़ने और ठगी की रकम वसलूने का काम कर रही है।
जालसाज व्यवसायी, गृहिणियां, नौकरीपेशा से लेकर रिटायर्ड बुजुर्ग तक हर वर्ग का व्यक्ति इन ठगों के जाल में फंस रहे है। ठग क्रेडिट-डेबिट कार्ड क्लोनिंग, डेटा चोरी, सिम स्वैप, स्किमिंग जैसे परिष्कृत तरीके अपना रहे हैं। लेकिन पीड़ितों की मुश्किल यहीं खत्म नहीं होती दिख रही है। बैंक भी आरबीआई के ‘शून्य दायित्व’ नियमों को नजरअंदाज कर बार-बार क्लेम रिजेक्ट कर देते हैं।
महाराष्ट्र साइबर सेल के आंकड़ों के मुताबिक, केवल क्रेडिट-डेबिट कार्ड, एटीएम फ्रॉड, सिम स्वैप, क्लोनिंग और ओटीपी शेयरिंग से जुड़े 4,132 मामले दर्ज हुए हैं। इनमें कुल नुकसान 161.5 करोड़ रुपये रहा, जबकि पुलिस मात्र 4.8 करोड़ रुपये ही रिकवर कर पाई है। जब तक पीड़ित जानबूझकर संवेदनशील जानकारी साझा नहीं करते, बैंक जिम्मेदार हैं।
| वर्ष | मुकदमे | सॉल्व केस | गिरफ्तारियां |
|---|---|---|---|
| 2020 | 2327 | 248 | 340 |
| 2021 | 2742 | 435 | 683 |
| 2022 | 4060 | 352 | 571 |
| 2023 | 3684 | 348 | 480 |
| 2024 | 4849 | 709 | 757 |
| 2025 | 1918 | 231 | 241 |
| वर्ष | केस दर्ज | सॉल्व केस | गिरफ्तारियां |
|---|---|---|---|
| 2020 | 457 | 764 | 877 |
| 2021 | 4873 | 973 | 1388 |
| 2022 | 6267 | 699 | 994 |
| 2023 | 6580 | 539 | 660 |
| 2024 | 8974 | 910 | 1007 |
| 2025 | 3236 | 331 | 366 |
बैंक अक्सर आरबीआई के शून्य-देयता नियमों की अनदेखी करते हैं। इसके लिए सख्त केवाईसी, तेज कार्ड ब्लॉकिंग, बेहतर समन्वय और सुरक्षा मानदंडों का उल्लंघन करने वाले बैंकों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, धोखाधड़ी के ये मामले कई तरीकों से जुड़े होते है।
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एक उदाहरण साकीनाका निवासी व्यवसायी रोमलजीत कौर मक्कड़ का है। जिनके क्रेडिट कार्ड की क्लोनिंग की गई और उन्हें 2।5 लाख रुपये का चूना लगा। 3 अप्रैल को, जब वह मुंबई स्थित अपने कार्यालय में एक मीटिंग में शामिल होने के लिए गई थी। तब उनके क्रेडिट कार्ड के साथ लखनऊ स्थित एक मर्चेंट मशीन से धोखाधड़ी वाले लेनदेन किए गए। मक्कड़ ने आरोप लगाया कि हो सकता है कि उस दिन खरीदारी के दौरान सीसीटीवी में उनका पिन कैद हो गया होगा।
वर्किंग वीमेन मुमताज खान ने कहा कि ग्राहकों की सुरक्षा करने के बजाय, बैंक अक्सर उन पर ही बोझ डाल देते हैं। जिससे अनगिनत नागरिक धोखाधड़ी होने के बाद भी लंबे समय तक कानूनी नोटिस, वसूली के लिए कॉल और नौकरशाही की उदासीनता से जूझते रहते हैं।
साइबर एक्सपर्ट एडवोकेट लूसी मैसी ने बताया कि धोखेबाज लीक और एटीएम स्कीमर के जरिए कार्ड का डाटा चुराते है, ओटीपी शेयर करने के लिए पीड़ितों को जिम्मेदार ठहराना गलत है। क्योंकि इस तरह की धोखाधड़ी आमतौर पर डेटा लीक और कमजोर सत्यापन जैसी व्यवस्थागत खामियों से उपजती है, जिससे बैंकों यानी ग्राहकों पर पूरे पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा की जिम्मेदारी आ जाती है।