महाराष्ट्र कैबिनेट का बड़ा फैसला: सरकारी जमीनों की लीज अब 49 साल, जानिए किसे मिलेगा फायदा, क्या बदलेंगे नियम?
Maharashtra Cabinet Decision: महाराष्ट्र कैबिनेट ने सरकारी जमीनों की लीज अवधि 30 से बढ़ाकर 49 वर्ष करने का फैसला लिया है, जिसे नियमों के पालन पर 98 वर्ष तक बढ़ाया जा सकेगा।
- Written By: आकाश मसने
कॉन्सेप्ट फोटो (सोर्स: AI)
Government Land Lease Policy: सरकारी जमीनों की पट्टे की अवधि 49 वर्ष करने का निर्णय महाराष्ट्र कैबिनेट ने लिया है। मंगलवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में राज्य के राजस्व में वृद्धि और व्यावसायिक विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कैबिनेट ने उक्त निर्णय लिया। इसका लाभ राज्य के विभिन्न प्रशासनिक विभागों, महामंडलों, मंडलों और प्राधिकरणों को मिलेगा, जो आय बढ़ाने के लिए व्यावसायिक उद्देश्य से जमीन पट्टे पर देते हैं।
राज्य सरकार के विभिन्न प्रशासनिक विभागों, महामंडलों, बोर्डों और प्राधिकरणों के स्वामित्व या नियंत्रण वाली सरकारी जमीनें अब व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए विभिन्न संस्थाओं को लंबी अवधि के पट्टे पर दी जा सकेगी। महाराष्ट्र भू-राजस्व संहिता, 1966 और महाराष्ट्र भू-राजस्व (सरकारी जमीन का निपटान) नियम, 1971 के तहत विभिन्न कारणों से सरकारी जमीन 30 वर्षों के लिए पट्टे पर दी जाती थी। नए निर्णय के अनुसार, अब इस अवधि को बढ़ाकर पहले चरण में अधिकतम 49 वर्ष किया जा सकेगा।
अधिकतम 98 वर्षों तक मिलेगा पट्टा
नए फैसले के अनुसार, अब यह जमीनें शुरुआत में अधिकतम 49 वर्षों के लिए पट्टे पर दी जा सकेगी। लेकिन यदि पट्टाधारक ने किसी भी नियम या शर्त का उल्लंघन नहीं किया है, तो संबंधित विभाग आवश्यकतानुसार इस पट्टे का नवीनीकरण कर सकेगा। अर्थात नियमों का पालन करने पर कुल अवधि 98 वर्ष तक जमीन का पट्टा मिल सकता है। इस निर्णय से विभिन्न महामंडलों, मंडलों और प्राधिकरणों को अपनी आय बढ़ाने और व्यावसायिक उद्देश्यों को पूरा करने में मदद मिलेगी। जिला कलेक्टर कार्यालय इन जमीनों के किराए और नवीनीकरण पर कड़ी निगरानी रखेंगे। इसके साथ ही पट्टे की जमीन के किराए (भूमि भाड़ा) में निश्चित अंतराल पर वृद्धि और किराए की नियमित वसूली व जिला प्रशासन द्वारा निगरानी सुनिश्चित की जाएगी।
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शत्रु संपत्ति की बिक्री पर स्टाम्प ड्यूटी में छूट
कैबिनेट ने ‘शत्रु संपत्ति’ की खरीद-बिक्री को आसान बनाने के लिए एक और अहम फैसला लिया है। अब केंद्र सरकार के कस्टोडियन ऑफ एनिमी प्रॉपर्टी ऑफ इंडिया (सीईपीआई) द्वारा बेची जाने वाली शत्रु संपत्तियों के पहले रजिस्ट्रेशन पर मुद्रांक शुल्क (स्टैंप ड्यूटी) पूरी तरह माफ कर दी गई है। युद्ध के दौरान जो लोग भारत छोड़कर शत्रु देशों में बस गए, उनकी संपत्तियों को ‘शत्रु संपत्ति’ कहा जाता है।
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राज्य में ऐसी कुल 428 संपत्तियां हैं, जिनमें सबसे अधिक मुंबई उपनगर (177) और ठाणे (86), पालघर में 77 और मुंबई में 62 संपत्तियां शामिल हैं। अक्सर इन संपत्तियों की नीलामी में खरीदारों की रुचि कम देखी गई है। सरकार का मानना है कि स्टांप ड्यूटी माफ होने से संपत्तियों की लागत कम होगी और खरीदार आकर्षित होंगे।
30 साल की समय सीमा बढ़ाई
सरकारी जमीनों की लीज अवधि अब 30 से बढ़ाकर 49 वर्ष कर दी गई है, जिसे आगे और 49 वर्षों के लिए रिन्यू किया जा सकेगा। शत्रु संपत्तियों की नीलामी को बढ़ावा देने के लिए पहली रजिस्ट्री पर स्टांप ड्यूटी माफ करने का निर्णय लिया गया है।
