तीसरी मुंबई को मिली हरी झंडी, फडणवीस कैबिनेट ने पास की भूमि अधिग्रहण नीति, FDI को लेकर भी किया बड़ा फैसला
Maharashtra Cabinet Decision: महाराष्ट्र कैबिनेट ने तीसरी मुंबई के विकास के लिए भूमि अधिग्रहण नीति को मंजूरी दी। 22.5% भूमि वापसी, FSI-TDR विकल्प, FDI को बढ़ावा देने से विकास को रफ्तार मिलेगी।
- Written By: सूर्यप्रकाश मिश्र | Edited By: आकाश मसने
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (सोर्स: सोशल मीडिया)
Third Mumbai Land Acquisition Policy: मंगलवार को हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में तीसरी मुंबई के विकास के लिए भूमि अधिग्रहण पॉलिसी को मंजूरी दी गई। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में प्रस्तावित थर्ड मुंबई के लिए जमीन देने की पॉलिसी के साथ राज्य में सिंचन परियोजनाओं के लिए 15 हजार करोड़ के लोन सहित कई निर्णय लिए गए।
‘नवनगर डेवलपमेंट अथॉरिटी’
नवी मुंबई के पड़ोस में होने वाली तीसरी मुंबई अर्थात अटल बिहारी वाजपेयी शिवड़ी-न्हावा शेवा अटल सेतु एवं नैना एरिया डेवलप के लिए बनाए गए “नवनगर डेवलपमेंट अथॉरिटी” को मंजूरी दी गई है। साथ ही, मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी (MMRDA) द्वारा भविष्य में लागू किए जाने वाले सभी डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स के लिए ज़मीन अधिग्रहण और वितरण के लिए एक पूरी पॉलिसी को भी मंजूरी दी गई। इस फ़ैसले से नए इलाकों के शहरीकरण, इंडस्ट्रियल इन्वेस्टमेंट, लॉजिस्टिक्स, रेजिडेंशियल-कमर्शियल प्रोजेक्ट्स और इंफ्रास्ट्रक्चर, कंस्ट्रक्शन ठोस दिशा मिलेगी।
22.5 प्रतिशत भूमि वापसी
महाराष्ट्र रीजनल प्लानिंग एंड टाउन प्लानिंग एक्ट, 1966 के सेक्शन 126(1) के तहत आपसी सहमति से तय रकम पर या ‘राइट टू फेयर कम्पनसेशन एंड ट्रांसपेरेंसी इन लैंड एक्विजिशन, रिहैबिलिटेशन एंड रिसेटलमेंट एक्ट, 2013’ के अनुसार मुआवजा तय करके ज़मीन अधिग्रहण को मंजूरी दी गई है। साथ ही, धारा 126(10) के तहत नकद प्रतिफल के बजाय फ्लोर एरिया इंडेक्स (FSI) या ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स (TDR) के रूप में मुआवजा देकर और आवश्यकतानुसार सुविधाओं/निर्माण कार्यों के लिए अतिरिक्त FSI/TDR देकर भूमि अधिग्रहण करने का प्रावधान है। इस नीति के तहत 22.5 प्रतिशत भूमि वापसी नीति लागू की जाएगी।
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बातचीत के जरिए निजी स्वामित्व वाली भूमि का अधिग्रहण करते समय, शहरी विकास विभाग के 1 मार्च 2014 और 28 मई 2014 के सरकारी निर्णयों के अनुसार परियोजना प्रभावित लोगों को विकसित भूखंड प्रदान करने की नीति लागू की जाएगी। 22.5 प्रतिशत वापसी योजना के तहत, यदि देय भूखंड का क्षेत्रफल 40 वर्ग मीटर से कम है, तो नकद मुआवजा दिया जाएगा। अविकसित क्षेत्रों में उद्योग लाने के लिए ‘पास-थ्रू नीति’ लागू करने की मंजूरी दी गई है। इस नीति के अनुसार, भूमि अधिग्रहण मुआवजे की लागत, बुनियादी ढांचे के विकास की लागत भूखंड धारक से किश्तों में वसूली जाएगी। ज़मीन खरीदने का पूरा खर्च, रजिस्ट्रेशन फ़ीस और एस्टैब्लिशमेंट फ़ीस प्लॉट होल्डर से वसूला जाएगा। MMRDA एस्टैब्लिशमेंट कॉस्ट का 15% चार्ज करेगा।
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एफडीआई का लक्ष्य
MIDC की फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) लाने की पॉलिसी के अनुसार, अटल सेतु इम्पैक्ट जोन में फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट लाने वाली इंडस्ट्रीज़ को प्रायोरिटी पर प्लॉट अलॉट किए जाएंगे। कम से कम 100 एकड़ ज़मीन खरीदना जरूरी है और जमीन की कीमत के अलावा, चार साल के अंदर हर 100 एकड़ पर कम से कम 250 करोड़ रुपये इन्वेस्ट करना जरूरी होगा। अनडेवलप्ड ज़मीन को बेचा या ट्रांसफर नहीं किया जा सकता है। कुल डेवलप्ड एरिया का 25% तक FDI के लिए अलाउड होगा। एलिजिबिलिटी और क्राइटेरिया MMRDA द्वारा तय टर्म्स एंड कंडीशंस के अनुसार होंगे।
जमीन को डेवलप करने और पार्टनरशिप के आधार पर स्पेशल पर्पस व्हीकल (SPV) बनाकर डेवलपमेंट सेंटर बनाने के लिए जमीन कलेक्टरों से प्रपोज़ल मंगाए जाएंगे। इस पॉलिसी के मुताबिक, MMRDA को ज़मीन देने के डिटेल्ड नियम तैयार करके मंजूरी के लिए सरकार को जमा करने का निर्देश दिया गया है। इस फ़ैसले से तीसरी मुंबई के डेवलपमेंट में तेजी आएगी और मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन में इंडस्ट्रियल और शहरी विस्तार के लिए नए डेवलपमेंट सेंटर बनेंगे।
