महाराष्ट्र में अनालॉग पनीर पर 1 साल का बैन, FDA जांच में 35% सैंपल फेल; सरकार का बड़ा फैसला
Maharashtra Government News: महाराष्ट्र सरकार ने सेहत से खिलवाड़ रोकने के लिए अनालॉग पनीर के उत्पादन, बिक्री और इस्तेमाल पर 1 साल का प्रतिबंध लगा दिया है। FDA जांच में 35% नमूने फेल पाए गए थे।
- Written By: रूपम सिंह
महाराष्ट्र में अनालॉग पनीर (सोर्स- सोशल मीडिया)
Maharashtra Analog Paneer Ban: महाराष्ट्र सरकार ने सार्वजनिक स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए राज्य में अनालॉग पनीर के उत्पादन, प्रसंस्करण, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री पर एक वर्ष का प्रतिबंध लगा दिया है। यह फैसला खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) की जांच रिपोर्ट के आधार पर लिया गया है, जिसमें बड़ी संख्या में नमूने निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे।
एफडीए जांच में सामने आई गंभीर गड़बड़ियां
एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे ने बताया कि 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 के बीच राज्यभर से पनीर के 308 नमूनों की जांच की गई। इनमें से 109 नमूने (35.4%) गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे। इनमें 79 नमूने सब-स्टैंडर्ड जबकि 30 नमूने असुरक्षित पाए गए। इन निष्कर्षों के बाद राज्य सरकार ने अनालॉग पनीर पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया।
होटल, रेस्तरां और क्लाउड किचन में भी पूरी तरह प्रतिबंध
सरकार के आदेश के अनुसार होटल, रेस्तरां, केटरिंग सेवाओं, क्लाउड किचन और अन्य सभी खाद्य सेवा प्रतिष्ठानों में अनालॉग पनीर के उपयोग पर पूर्ण रोक रहेगी। एफडीए ने स्पष्ट किया है कि किसी भी खाद्य व्यवसायी द्वारा इस प्रतिबंध का उल्लंघन करने पर जब्ती, जुर्माना, लाइसेंस निलंबन या रद्द करने जैसी कार्रवाई के साथ अभियोजन भी चलाया जाएगा।
सम्बंधित ख़बरें
महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला: सरकारी सेवाएं होंगी पूरी तरह डिजिटल, फाइल मंजूरी सिर्फ 3 स्तर तक सीमित
मुंबई में Gen Z और Gen Alpha के साथ कल सीधा संवाद करेंगे RSS प्रमुख मोहन भागवत; NMACC में तैयारी पूरी
बिना टिकट यात्रा पड़ेगी भारी! पश्चिम रेलवे ने वसूला ₹83.25 करोड़ जुर्माना, फर्जी UTS ऐप पर FIR दर्ज
MBBS बनाम BHMS: मिक्सोपैथी पर क्यों मचा घमासान? जानें 60% अस्पतालों को चलाने वाले डॉक्टरों का पक्ष
उपभोक्ताओं को बिना जानकारी दिए परोसा जा रहा था अनालॉग पनीर
एफडीए मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में आयुक्त तुकाराम मुंढे ने कहा कि जांच के दौरान यह सामने आया कि कई होटल, रेस्तरां, केटरिंग सेवाओं और क्लाउड किचनों में ग्राहकों को बिना स्पष्ट जानकारी दिए अनालॉग पनीर परोसा जा रहा था। इससे उपभोक्ताओं को गुमराह किया जा रहा था और खाद्य सुरक्षा मानकों का भी उल्लंघन हो रहा था।
यह भी पढ़ें: – महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला: सरकारी सेवाएं होंगी पूरी तरह डिजिटल, फाइल मंजूरी सिर्फ 3 स्तर तक सीमित
जरूरत पड़ने पर बढ़ सकती है प्रतिबंध की अवधि
महाराष्ट्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल यह प्रतिबंध एक वर्ष के लिए लागू रहेगा। हालांकि, यदि समीक्षा के बाद जनस्वास्थ्य के हित में इसकी आवश्यकता महसूस हुई तो प्रतिबंध की अवधि आगे भी बढ़ाई जा सकती है। सरकार का कहना है कि खाद्य सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी।
