मराठी स्कूल (सोर्स- सोशल मीडिया)
Maharashtra Assembly News: एक तरफ जहां राज्य में मराठी भाषा के संवर्धन, संरक्षण को लेकर कई उपाय किए जा रहे हैं,वहीं दूसरी तरफ महाराष्ट्र में हजारों मराठी विद्यालय बंद होने के कगार पर पहुंच रहे हैं। शुक्रवार को मराठी भाषा दिवस पर विधानसभा में मराठी विद्यालयों में विद्यार्थियों की घटती संख्या को लेकर सदस्यों ने सवाल उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा।
राज्य में बढ़ते शहरीकरण के चलते ग्रामीण इलाकों से बड़े पैमामे पर माइग्रेशन हो रहा है। इसके चलते ग्रामीण व कस्बों में चल रहे हजारों मराठी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या काफी घट गई है। राज्य भर में 2 हजार मराठी विद्यालय विद्यार्थियों की कमी की वजह से बंद पड़ने के कगार पर हैं।
सदस्यों ने सवाल किया कि क्या इनमें सबसे ज्यादा विद्यालय कोंकण और पश्चिम महाराष्ट्र के हैं? इसके अलावा इस समय राज्य में मराठी विद्यालयों की स्थिति पर सवाल किया गया। मराठी स्कूल बंद न हों इसके लिए पिछले दिनों सिंधुदुर्ग में शिक्षक,विद्यार्थी एवं संस्थाचालकों ने मोर्चा भी निकाला था।
मराठी स्कूलों की तरफ से विद्यार्थियों द्वारा मुख फेरे लिए जाने से राज्य भर में शिक्षक व शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के 72 हजार पद कम हो गए हैं। यह आंकड़ा पिछले 15 साल का है। ग्रामीण भागों से रोजगार की तलाश में लोगों का पलायन हुआ है।
सामाजिक आर्थिक कारणों की वजह से इसका असर स्कूलों पर पड़ा है। विधायक विक्रम पाचपुते, प्रवीण दटके,रोहित पवार अमित देशमुख, जितेंद्र आव्हाड सहित कई सदस्यों ने राज्य में मराठी स्कूलों की दयनीय स्थिति पर सवाल उठाया।
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मराठी स्कूलों में विद्यार्थियों की घटी संख्या पर शालेय शिक्षा मंत्री दादा भूसे ने कहा कि यह सच्चाई है कि अभिभावकों का ध्यान अपने बच्चों को अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाने और पलायन की वजह से ग्रामीण भागों में मराठी स्कूलों पर कुछ असर हुआ है। हालांकि स्कूलों से छात्रों का क्षरण रोकने सरकार कई स्तर पर प्रयास कर रही है। सतारा सांगली में 540 मराठी स्कूलों को मॉडर्न स्कूल बनाया गया है।
इसी तरह सरकारी एवं स्थानीय निकाय के स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने 477 ‘आदर्श स्कूल’ व 827 “पीएमश्री स्कूल” बनाए गए हैं। पहली से आठवी तक मराठी स्कूलों में सारी सुविधाएं मुफ्त में उपलब्ध कराई जा रहीं हैं। शिक्षा मंत्री ने कहा कि राज्य भर में निजी संस्थानों के 6963 प्राथमिक विद्यालयों में 49,543 और 17,263 माध्यमिक विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या के आधार पर 1,92,584 शिक्षकों के पद मंजूर किए गए हैं ।