बाजार समितियों में अब 50 किलो से अधिक के बोरों पर रोक, मजदूरों के हित में बड़ा फैसला
Mathadi Workers Relief Decision: महाराष्ट्र सरकार ने बाजार समितियों में मजदूरों के हित में बड़ा फैसला लेते हुए कृषि उपज की बोरियों का अधिकतम वजन 50 किलोग्राम तय किया है।
- Written By: आंचल लोखंडे
Mathadi workers Relief Decision (सोर्सः सोशल मीडिया)
Maharashtra Labour Welfare Policy: राज्य की सभी कृषि उपज बाजार समितियों में अब शेतमाल (कृषि उपज) की बोरियों और पैकेटों का वजन अधिकतम 50 किलोग्राम ही होगा। यह निर्णय विश्व श्रम परिषद के दिशानिर्देशों और राज्य के माथाडी (बोझा ढोने वाले) मजदूरों की लंबित मांग को देखते हुए लिया गया है।
विपणन मंत्री जयकुमार रावल ने सभी बाजार समितियों को इस आदेश का प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन करने का निर्देश दिया है। साथ ही, विपणन विभाग को जल्द से जल्द शासनादेश जारी करने को कहा गया है।
माथाडी मजदूरों की मांग
माथाडी मजदूरों की लंबे समय से मांग थी कि प्याज, आलू जैसी उपज की 50 किलो से अधिक वजन वाली बोरियां नहीं भरी जानी चाहिए, ताकि उन्हें अधिक वजन उठाने के कारण शारीरिक परेशानी न झेलनी पड़े। इस मांग के संबंध में मंत्रालय में बुधवार को एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें वन मंत्री गणेश नाईक, विधायक शरद सोनवणे, मजदूर नेता, विपणन एवं श्रम विभाग के अधिकारी तथा व्यापारी प्रतिनिधि उपस्थित थे।
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केंद्र से भी समान नियम बनाने की मांग
विपणन मंत्री जयकुमार रावल ने कहा कि मजदूरों के शारीरिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए यह ऐतिहासिक फैसला लिया गया है। अब राज्य की सभी 305 बाजार समितियों में इसकी सख्ती से पालना सुनिश्चित की जाएगी। वहीं, वन मंत्री गणेश नाईक ने कहा कि अन्य राज्यों से आने वाली उपज की बोरियां भी 50 किलो से अधिक न हों, इसके लिए केंद्र सरकार से देशव्यापी नियम बनाने का आग्रह किया जाएगा। इस संबंध में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को प्रस्ताव भेजा जाएगा।
