

Maharashtra Anti Conversion Law: जबरन और प्रलोभन देकर कराए जाने वाले धर्म परिवर्तन पर रोक लगाने के उद्देश्य से तैयार किया गया ‘महाराष्ट्र धर्मस्वातंत्र्य विधेयक 2026’ अब कानून बनने की राह पर है। मंगलवार को गृह राज्य मंत्री (ग्रामीण) पंकज भोयर ने इसे विधान परिषद में पेश किया, जहां सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों के बीच पूरे दिन व्यापक चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को विधानसभा में स्पष्ट किया था कि यह विधेयक किसी एक धर्म के खिलाफ नहीं, बल्कि हर नागरिक को धोखाधड़ी और जबरन धर्मांतरण से सुरक्षित करने के लिए है। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र से पहले देश के 12 राज्यों में इस तरह का कानून लागू है।
विधेयक के अनुसार, प्रलोभन, बल प्रयोग या धोखाधड़ी के माध्यम से कराया गया धर्म परिवर्तन अवैध माना जाएगा। इसके उल्लंघन पर 7 साल तक की कैद और 1 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। नाबालिगों, एससी या एसटी वर्ग से जुड़े मामलों में 7 साल की सजा और 5 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। सामूहिक धर्मांतरण या बार-बार अपराध करने पर 10 साल तक की सजा का प्रावधान है। इसके साथ ही अवैध धर्मांतरण के जरिए किया गया विवाह स्वतः अमान्य माना जाएगा।
इस विधेयक पर विधानसभा में भी जोरदार बहस हुई। राकांपा (शरद पवार गुट) के जितेंद्र आव्हाड ने इसे ‘धर्म नियंत्रण’ बताते हुए नाम पर आपत्ति जताई। कांग्रेस नेता असलम शेख और सपा विधायक रईस शेख ने इसे एकतरफा और संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन बताया। चर्चा के दौरान जितेंद्र आव्हाड की एक विवादित टिप्पणी पर सत्ता पक्ष ने हंगामा किया, जिसके चलते सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी। बाद में विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर के निर्देश पर आव्हाड ने अपने शब्द वापस लेते हुए खेद व्यक्त किया। विरोध के बावजूद यह विधेयक सोमवार को विधानसभा में पारित हो गया।
इस विधेयक ने विपक्ष की एकता को प्रभावित किया। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) के विधायक भास्कर जाधव ने विधानसभा में और अनिल परब ने विधान परिषद में विधेयक का समर्थन किया। अनिल परब ने कहा कि राज्य में जबरन धर्म परिवर्तन के मामले बढ़ रहे हैं और इसे रोकने के लिए सख्त कानून आवश्यक है।
इस समर्थन से कांग्रेस और राकांपा (शरद पवार गुट) का विरोध कमजोर पड़ गया। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने उद्धव ठाकरे का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस कानून से प्रलोभन और दबाव के जरिए धर्मांतरण कराने वाली संस्थाओं पर कड़ा प्रहार होगा।
विधान परिषद से पारित होने के बाद यह विधेयक राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। उनकी स्वीकृति मिलते ही महाराष्ट्र में धर्मांतरण विरोधी कानून लागू हो जाएगा। उल्लेखनीय है कि डॉ. नीलम गोऱ्हे ने वर्ष 2004 में मेलघाट के आदिवासियों के जबरन धर्मांतरण का मुद्दा विधानमंडल में उठाया था। लगभग दो दशक बाद यह मुद्दा अब कानून का रूप लेने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।