11वीं प्रवेश प्रक्रिया (फाइल फोटो)
Maharashtra Education Department Admission: महाराष्ट्र में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए 11वीं कक्षा की केंद्रीय ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया (Admission) आधिकारिक तौर पर शुरू हो गई है। शिक्षा निदेशालय द्वारा 10 अप्रैल से शुरू की गई इस प्रक्रिया में छात्रों का भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। शुरुआती चार दिनों के भीतर ही राज्य भर से 90 हजार से अधिक छात्रों ने पंजीकरण करा लिया है।
प्रवेश प्रक्रिया के कार्यक्रम के अनुसार, छात्रों के लिए ऑनलाइन पंजीकरण 10 अप्रैल को सुबह 10 बजे से शुरू हुआ है। आवेदन पत्र का पहला भाग भरने की अंतिम तिथि 30 अप्रैल 2026 शाम 5 बजे तक निर्धारित की गई है। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि 10वीं की परीक्षा देने वाले सभी पात्र छात्रों को इस समय सीमा के भीतर अपना पंजीकरण पूरा करना अनिवार्य है।
ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अब तक कुल 90,096 छात्रों ने पंजीकरण किया है। इसमें लड़कों की संख्या 42,972 और लड़कियों की संख्या 42,249 है। पंजीकरण के मामले में मुंबई और पुणे मंडल सबसे आगे हैं। मुंबई मंडल में अब तक 13,992 आवेदन आए हैं, जिनमें लड़कियों की संख्या (7,270) लड़कों (6,653) से अधिक है।
पुणे में भी 10,000 छात्रों ने पंजीकरण कराया है। अन्य मंडलों की बात करें तो नाशिक में 3,657, कोल्हापुर में 2,570, अमरावती में 2,501 और नागपुर में 2,036 छात्रों ने आवेदन किया है। लातूर मंडल में फिलहाल सबसे कम यानी 1,422 पंजीकरण हुए हैं।
पंजीकरण कराने वाले कुल छात्रों में से अब तक 15,431 विद्यार्थियों ने अपना प्रवेश शुल्क जमा कर दिया है। कई आवेदन वर्तमान में सत्यापन और अंतिम मंजूरी की प्रतीक्षा में हैं। शिक्षा विभाग ने छात्रों और अभिभावकों से अपील की है कि वे अंतिम समय की तकनीकी दिक्कतों से बचने के लिए 30 अप्रैल से पहले अपनी आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें। पिछले वर्ष की तरह इस बार भी पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और सुगम बनाने के लिए ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से संचालित किया जा रहा है।
यह भी पढ़ें – पहले शिवसेना, फिर NCP और अब JDU की बारी? BJP का सियासी खेल, बिहार में ऐसे बदला पूरा ‘गेम’!
राज्य में शिक्षकों की समस्याओं को लेकर असंतोष बढ़ता जा रहा है। लंबित वेतन, वर्षों से बकाया देय राशि और गैर-शैक्षणिक कार्यों के बोझ के विरोध में राज्यभर के शिक्षकों ने 16 अप्रैल 2026 को आंदोलन करने का निर्णय लिया है। शिक्षक संगठनों का आरोप है कि मार्च महीने का वेतन अब तक जारी नहीं किया गया है, जिससे हजारों शिक्षक आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।
समय पर वेतन न मिलने के कारण कई शिक्षकों को घर खर्च चलाने, कर्ज की किस्त भरने और दैनिक जरूरतों को पूरा करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा, शिक्षकों की वर्षों पुरानी बकाया राशि भी अब तक नहीं दी गई है। कुछ मामलों में यह बकाया छह साल तक लंबित है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और अधिक खराब हो गई है। वहीं, अतिरिक्त घोषित शिक्षकों को न तो वेतन मिल रहा है और न ही उन्हें नई नियुक्ति दी गई है।