साउथ बॉम्बे केबल स्टे ब्रिज (सौ. सोशल मीडिया )
Mumbai News In Hindi: दक्षिण मुंबई के महालक्ष्मी क्षेत्र में ट्रैफिक जाम की समस्या से राहत दिलाने के उद्देश्य से बनाए जा रहे केबल-स्टेड फ्लाईओवर का कार्य तेजी से प्रगति पर है।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत 78.5 मीटर ऊंचे पायलॉन (विशाल लोहे का पिलर) के निर्माण का लगभग 55 प्रतिशत कार्य पूरा कर लिया गया है।बीएमसी के मुताबिक, अक्टूबर तक इस ब्रिज का कार्य पूरा हो जाएगा, जिसके बाद आम जनता के लिए यह ब्रिज शुरू किया जाएगा।
महालक्ष्मी रेलवे स्टेशन के समीप केशवराव खाड्ये मार्ग पर बन रहा यह ब्रिज बीएमसी का रेलवे पटरियों पर बनने वाला पहला केबल आधारित पुल होगा। गुरुवार को अतिरिक्त बीएमसी आयुक्त (परियोजना) अभिजीत बांगर ने परियोजना स्थल का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया और अधिकारियों को कार्य निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान बांगर ने कहा कि पायलॉन केबल स्टेड पुल की सबसे महत्वपूर्ण संरचनात्मक इकाई है, जिस पर पुल के डेक को सहारा देने वालों केबलें टिकी होती हैं। प्रस्तावित पुल के लिए तैयार किया जा रहा 78.5 मीटर ऊंचा पायलॉन इंजीनियरिंग की दृष्टि से अत्यंत चुनौतीपूर्ण है।
इसके निर्माण में उच्च गुणवत्ता वाले कंक्रीट और मजबूत स्टील सामग्री का उपयोग किया जा रहा है। जिससे पुल की मजबूती और टिकाऊपन सुनिश्चित किया जा सके, ब्रिज की कुल लंबाई 803 मीटर और चौड़ाई 17.2 मीटर है, जबकि रेलवे क्षेत्र में इसकी चौड़ाई 23.01 मीटर रखी गई है। यह ब्रिज पश्चिम रेलवे के ऊपर से सात रास्ता को महालक्ष्मी मैदान से जोड़ेगा, जिससे इस इलाके में वर्षों से चली आ रही ट्रैफिक जाम में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है।
परियोजना के तहत पायलॉन के पश्चिम दिशा में 95 मीटर और पूर्व दिशा में 165 मीटर के दो अलग-अलग स्पैन बनाए जा रहे हैं। पश्चिमी स्पैन का कार्य फरवरी 2026 के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि पूर्वी स्पैन का निर्माण रेलवे विभाग से आवश्यक ब्लॉक मिलने के बाद मार्च से अक्टूबर 2026 के बीच किया जाएगा।
अधिकारियों के अनुसार, पायलॉन के दोनों ओर अधिकांश खंभों का निर्माण पूरा हो चुका है, हालांकि यातायात डायवर्जन के कारण कुछ स्तंभों का कार्य अभी शेष है। इसके अलावा, दोनों दिशाओं के अप्रोच रोड का निर्माण भी आगामी महीनों में शुरू किया जाएगा।
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अतिरिक्त आयुक्त ने निर्देश दिए कि सुरक्षा मानको गुणवत्ता नियंत्रण और तकनीकी जांच प्रक्रियाओं का सख्ती से पालन किया जाए। साथ ही, मानसून के दौरान भी कार्य प्रभावित न हो, इसके लिए पूर्व नियोजन करने पर जोर दिया गया है। नगर निगम का लक्ष्य है कि सभी निर्माण एवं सहायक कार्य 31 अक्टूबर 2026 तक पूर्ण कर फ्लाईओवर को यातायात के लिए खोल दिया जाए।