Lenskart Controversy: ‘हिजाब तो ठीक है लेकिन बिंदी, तिलक, कलावा नहीं’, लेंसकार्ट के ड्रेस कोड पर भड़के लोग
Boycott Lenskart News: लेंसकार्ट के ड्रेस कोड में हिजाब की अनुमति, पर बिंदी-तिलक पर बैन। अशोक पंडित ने लेंसकार्ट के बायकॉट की अपील की। सोशल मीडिया पर छिड़ा संग्राम।
- Written By: अनिल सिंह
Lenskart Style Guide Controversy (फोटो क्रेडिट-X)
Lenskart Style Guide Controversy: चश्मा और आईवियर क्षेत्र की दिग्गज कंपनी लेंसकार्ट (Lenskart) इस समय एक बड़े सोशल मीडिया विवाद के केंद्र में है। विवाद की जड़ कंपनी द्वारा कर्मचारियों के लिए जारी किया गया एक कथित ‘स्टाइल गाइड’ (ड्रेस कोड) है, जिसके स्क्रीनशॉट इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। इस गाइडलाइन में धार्मिक प्रतीकों को लेकर अपनाए गए दोहरे मानदंडों ने लोगों को आक्रोशित कर दिया है। फिल्म निर्माता अशोक पंडित और लेखिका शेफाली वैद्य सहित कई प्रमुख हस्तियों ने कंपनी पर हिंदू भावनाओं के प्रति असंवेदनशील होने का आरोप लगाते हुए जनता से लेंसकार्ट के उत्पादों के बहिष्कार (Boycott) की अपील की है।
विवाद तब शुरू हुआ जब कथित स्टाइल गाइड का 11वां पन्ना सार्वजनिक हुआ। इसमें ग्रूमिंग और यूनिफॉर्म से जुड़े नियमों का विस्तृत विवरण दिया गया है। वायरल स्क्रीनशॉट के अनुसार, कंपनी अपने कर्मचारियों को हिजाब और पगड़ी पहनने की अनुमति तो देती है (बशर्ते वे काले रंग के हों), लेकिन हिंदू धर्म में पवित्र माने जाने वाले धार्मिक तिलक, टीका, बिंदी, कलावा और सिंदूर पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाती है। इस नीति को लेकर सोशल मीडिया पर ‘कॉर्पोरेट जिहाद’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जा रहा है और कंपनी के संस्थापक पीयूष बंसल से स्पष्टीकरण मांगा जा रहा है।
भेदभावपूर्ण ड्रेस कोड और ग्रूमिंग नियम
लेंसकार्ट कंपनी के स्टाइल गाइड के अनुसार, यदि कोई कर्मचारी हिजाब पहनता है, तो उसे मध्यम चेस्ट कवरेज वाला और काले रंग का होना चाहिए ताकि कंपनी का लोगो न ढके। सिखों के लिए भी केवल काली पगड़ी अनिवार्य की गई है। हालांकि, विवाद तब बढ़ गया जब उसी पन्ने पर स्पष्ट रूप से लिखा गया कि किसी भी तरह का धार्मिक तिलक, बिंदी या स्टिकर लगाने की इजाजत नहीं है। यहाँ तक कि मेहंदी लगाने पर भी कड़ी पाबंदी है और विशेष अवसरों पर मैनेजमेंट की मंजूरी के बाद ही इसे सीमित समय के लिए लगाने की अनुमति दी गई है।
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अशोक पंडित और शेफाली वैद्य का तीखा हमला
सामाजिक कार्यकर्ता अशोक पंडित ने इंस्टाग्राम और अन्य प्लेटफार्मों पर कंपनी की इस नीति की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने सवाल उठाया कि एक ऐसी कंपनी जो भारत जैसे हिंदू-बहुल देश में फल-फूल रही है और जिसके अधिकांश ग्राहक और कर्मचारी हिंदू हैं, वह हिंदू प्रतीकों पर इस तरह की पाबंदी कैसे लगा सकती है? लेखिका शेफाली वैद्य ने भी पुष्टि करते हुए कहा कि कंपनी के अंदरूनी नियम धार्मिक पहचान के मामले में अलग-अलग दृष्टिकोण रखते हैं, जो कि कार्यस्थल पर समानता के सिद्धांतों के खिलाफ है।
सोशल मीडिया पर बायकॉट और आक्रोश
इस खुलासे के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने लेंसकार्ट के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कई लोगों का कहना है कि कॉर्पोरेट क्षेत्र में ग्रूमिंग के नाम पर सांस्कृतिक पहचान को मिटाया जा रहा है। यूजर्स ने तर्क दिया कि यदि हिजाब और पगड़ी कार्यस्थल की पेशेवरता में बाधा नहीं हैं, तो बिंदी और कलावा पर प्रतिबंध क्यों? इस विवाद के कारण प्ले स्टोर पर लेंसकार्ट ऐप की रेटिंग गिराने और ऑर्डर्स कैंसिल करने की मुहिम भी शुरू हो गई है। अब देखना यह होगा कि कंपनी इस बढ़ते विवाद पर क्या आधिकारिक रुख अपनाती है।
