'धर्म के नाम पर खुले में कत्ल बर्दाश्त नहीं', बकरीद को लेकर किरीट सोमैया ने मुंबई मेयर को लिखा पत्र

Kirit Somaiya Bakrid Mumbai BMC Guidelines: किरीट सोमैया ने मुंबई में खुले में और सोसायटियों के भीतर बकरीद की कुर्बानी पर रोक लगाने के लिए बीएमसी को पत्र लिखा।
Kirit Somaiya Bakrid BMC Letter
'खुले में कुर्बानी बर्दाश्त नहीं'; बकरीद से पहले किरीट सोमैया ने बीएमसी कमिश्नर को लिखा कड़ा पत्र (फोटो क्रेडिट-X)
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Kirit Somaiya Bakrid BMC Letter: बकरीद (ईद-उल-अजहा) के आगामी त्योहार को देखते हुए मुंबई में प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर सरगर्मियां बढ़ गई हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. किरीट सोमैया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए जानकारी दी है कि उन्होंने मुंबई नगर निगम प्रशासन को पत्र लिखकर रिहायशी बस्तियों में अवैध रूप से होने वाले पशु वध को रोकने की मांग की है। सोमैया का कहना है कि नियमों के मुताबिक मुंबई की किसी भी घनी आबादी वाले रिहायशी इलाके या चालों के पास पशुओं की कुर्बानी नहीं दी जा सकती।

अपने पत्र में किरीट सोमैया ने इस बात को रेखांकित किया कि उच्च न्यायालय और नगर निगम के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के बावजूद कुछ क्षेत्रों में सरेआम नियमों की धज्जियां उड़ाई जाती हैं। उन्होंने मांग की है कि बीएमसी के सभी वार्ड अधिकारियों और स्थानीय पुलिस को त्योहार से पहले ही अलर्ट पर रखा जाए ताकि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई की जा सके।

सार्वजनिक स्वच्छता और सुरक्षा का हवाला

किरीट सोमैया का तर्क है कि रिहायशी सोसायटियों और खुले मैदानों में पशु वध किए जाने से न केवल गंदगी फैलती है, बल्कि बच्चों और अन्य नागरिकों के स्वास्थ्य और मानसिक स्थिति पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उन्होंने बीएमसी से आग्रह किया है कि केवल अधिकृत और चिन्हित कत्लखानों (Slaughterhouses) में ही कुर्बानी की अनुमति दी जानी चाहिए और अवैध रूप से पशुओं के परिवहन और वध पर पूरी तरह रोक लगनी चाहिए।

वार्ड स्तर पर सख्त निगरानी की मांग

भाजपा नेता ने प्रशासन से अनुरोध किया है कि मुंबई के सभी 24 वार्डों में विशेष उड़न दस्तों का गठन किया जाए। ये दस्ते इस बात की निगरानी करें कि कहीं भी सोसायटियों के भीतर अस्थायी कत्लखाने न बनाए जाएं। उन्होंने कहा कि कानून का अनुपालन सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी तरह की ढिलाई सांप्रदायिक सौहार्द और नागरिक व्यवस्था को बिगाड़ सकती है।

प्रशासन के रुख पर टिकी निगाहें

मई के अंतिम सप्ताह में मनाए जाने वाले इस त्योहार को लेकर मुस्लिम समुदाय जहां अपनी तैयारियों को अंतिम रूप दे रहा है, वहीं किरीट सोमैया के इस पत्र ने प्रशासनिक अधिकारियों के सामने एक नई चुनौती खड़ी कर दी है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मुंबई महानगरपालिका और पुलिस प्रशासन इस संवेदनशील मामले को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने और नियमों का पालन करवाने के लिए क्या कदम उठाता है।

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