

NEET Paper Leak Bulldozer Action: नीट परीक्षा प्रश्नपत्र लीक मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, इस पर राजनीतिक घमासान भी तेज होता जा रहा है। विपक्ष ने इस मुद्दे को लेकर केंद्र और राज्य की सत्ताधारी भाजपा सरकार को आड़े हाथों लिया है। इसी कड़ी में, मालेगांव सेंट्रल के पूर्व विधायक आसिफ शेख ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि भाजपा इस संवेदनशील मामले में दोहरी चाल चल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कागजी कार्रवाई और जांच में ढील देकर मुख्य आरोपियों को संरक्षण दिया जा रहा है।
आसिफ शेख ने सरकार की कार्यप्रणाली की आलोचना करते हुए कहा कि इस परीक्षा घोटाले ने देश के लाखों ईमानदार छात्रों के भविष्य को अंधकार में धकेल दिया है। ऐसे गंभीर अपराध में शामिल लोगों के खिलाफ वैसी सख्त कार्रवाई क्यों नहीं दिख रही है, जैसी अन्य मामलों में दिखाई जाती है? उन्होंने पूछा कि क्या इस मामले में भी कार्रवाई तय करने के लिए आरोपियों की जाति और धर्म को आधार बनाया जा रहा है?
अपने बयानों को तार्किक रूप देने के लिए पूर्व विधायक ने नासिक के चर्चित टीसीएस (TCS) मामले का उदाहरण सामने रखा। उन्होंने कहा कि टीसीएस विवाद में आरोपी निदा खान की मदद करने के संदेह में मतीन पटेल का औरंगाबाद स्थित मकान प्रशासन द्वारा गिरा दिया गया था। शेख का तर्क है कि जब वहां बिना किसी पुख्ता सबूत के इतनी त्वरित और दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है, तो फिर नीट जैसे देश के सबसे बड़े शिक्षा घोटाले के आरोपियों के घरों पर बुलडोजर कब चलाया जाएगा?
आसिफ शेख ने कहा कि सरकार की वर्तमान कार्रवाई को देखकर ऐसा बिल्कुल नहीं लगता कि वह छात्रों के साथ न्याय करना चाहती है। देश के इतने बड़े परीक्षा तंत्र में सेंध लगाने वाले अपराधियों को सिर्फ हिरासत में लेकर औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं, जबकि उनके अवैध निर्माणों या संपत्तियों पर कोई ठोस प्रशासनिक प्रहार नहीं हुआ है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या कानून की यह कड़ाई केवल चुनिंदा मामलों के लिए ही आरक्षित है?
पूर्व विधायक के इस कड़े रुख और 'बुलडोजर पॉलिटिक्स' पर उठाए गए सवालों के बाद महाराष्ट्र के राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। विपक्ष लगातार मांग कर रहा है कि नीट परीक्षा के मास्टरमाइंड, चाहे वे कितने ही रसूखदार क्यों न हों, उनके खिलाफ सख्त से सख्त दंडात्मक और आर्थिक कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी देश के युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने की हिम्मत न कर सके।