KEM अस्पताल का नाम बदलने पर सियासी संग्राम, अमोल कोल्हे ने मंत्री लोढ़ा को घेरा

KEM Hospital का नाम बदलने की मांग पर महाराष्ट्र की राजनीति गरमा गई है। मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा के बयान पर सांसद डॉ. अमोल कोल्हे ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाए।
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केईएम अस्पताल (सौ. सोशल मीडिया )
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Mumbai News In Hindi: बीएमसी की ओर से संचालित केईएम अस्पताल के नाम बदलने को लेकर सियासत गरमा गई है। कौशल विकास मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने हॉस्पिटल के नाम में जुड़े किंग एडवर्ड को गुलामी की निशानी बताते हुए इसे बदल देने की मांग की है।

इस पर एनसीपी (एसपी) के सांसद डॉ अमोल कोल्हे ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने लोढ़ा को अपने कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्टों को अंग्रेजी के बजाए राम कुटीर, सीता सदन, लक्ष्मी निवास जैसे देश की मिट्टी से जुड़े नाम देने की सलाह दी है।

अमोल कोल्हे कहा कि लोढ़ा को केईएम के इतिहास के बारे में शायद ठीक से पता नहीं होगा। आजादी के समय भी केईएम अस्पताल ने नियम लागू किया था कि यहां सिर्फ़ भारतीय डॉक्टर ही होने चाहिए, बीएमसी के सिर्फ पांच मेडिकल कॉलेज हैं। इनमें से चार 1950 से पहले बने थे। इसका मतलब है कि आजादी के 75 वर्ष में हम सिर्फ एक मेडिकल कॉलेज जोड़ पाए हैं।

नाम बदलने के बजाय, मुंबई में स्टैंडर्ड हॉस्पिटल बनाएं

लोढ़ा को इस बारे में सोचना चाहिए। नाम बदलना भावनिक मुद्दा हो सकता है, लेकिन सार्वजनिक स्वास्थ्य की असल हालत पर भी ध्यान देना जरूरी है। मुंबई की आबादी 2 करोड़ है और उपलब्ध बेड की संख्या 50 हजार है। इनमें से सिर्फ 15 हजार बेड मनपा अस्पतालों में है।

लोढा ने रेजिडेंट डॉक्टरों से थोड़ी बातचीत की होती, तो उन्हें उनकी समस्याओं और काम के दबाव के बारे में पता होता। लोढा एक कंस्ट्रक्शन प्रोफेशनल है। उनके प्रोजेक्ट्स के नाम लोढ़ा बेलमडो, लोढ़ा बेलाजियो, अल्टामाउंट, कासा बेला, ट्रंप टावर है। इसके बजाय आप अपनी मिट्टी से जुड़े नाम क्यों नहीं रखते।

आपको आम जनता के हॉस्पिटल के नाम से एलर्जी है। नाम बदलने के बजाय, स्टैंडर्ड हॉस्पिटल बनाएं, फिर उन्हें मनचाहे नाम दे। मंत्री लोढ़ा ने बीते दिनों केईएम हॉस्पिटल के नाम का मुद्दा उठाते हुए कहा था कि किंग एडवर्ड नाम गुलामी की निशानी है। इसलिए यह नाम बदल देना चाहिए। एडवर्ड नाम रखने की क्या जरूरत है? भारत को आजाद हुए 75 साल हो गए है।

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