MNS ने शिंदे सेना को समर्थन दिया तो आगबबूला हुए संजय राउत, राज ठाकरे से बाेले कांग्रेस की तरह दिखाओ हिम्मत
KDMC Election 2026: कल्याण-डोंबिवली चुनाव के नतीजों के बाद संजय राउत ने मनसे-शिंदे गठबंधन पर तीखा हमला बोला। शिंदे गुट को ‘मराठियों के बीच की AIMIM’ बताया। साथ ही राज ठाकरे को भी दे दी सलाह।
- Written By: आकाश मसने
संजय राउत व राज ठाकरे (सोर्स: सोशल मीडिया)
Sanjay Raut Statement: महाराष्ट्र की राजनीति में कल्याण-डोंबिवली चुनाव (KDMC Election 2026) के नतीजों के बाद बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने मनसे और एकनाथ शिंदे की शिवसेना के बीच हुए अप्रत्याशित गठबंधन पर कड़ा प्रहार किया है। राउत ने शिंदे गुट की तुलना ‘एमआईएम’ से करते हुए इसे मराठी मानुष के साथ विश्वासघात बताया है।
कल्याण-डोंबिवली में सत्ता समीकरणों के बदलते ही संजय राउत ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट पर अब तक का सबसे कड़ा हमला बोला है। राउत ने शिंदे गुट को “मराठियों के बीच की एमआईएम” करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह गुट पूरी तरह से बेईमान और महाराष्ट्रद्रोही है, जिसने न केवल बालासाहेब ठाकरे के विचारों के साथ बल्कि पूरे राज्य के साथ गद्दारी की है। राउत के अनुसार, जो लोग इन ‘गद्दारों’ का साथ दे रहे हैं, वे भी उन्हीं विशेषणों के पात्र बन जाते हैं।
राज ठाकरे को दी सख्त कार्रवाई की सलाह
मनसे द्वारा शिंदे गुट को दिए गए समर्थन पर संजय राउत ने कहा कि इसे केवल स्थानीय स्तर का फैसला कहकर टाला नहीं जा सकता। उन्होंने दावा किया कि इस फैसले से खुद राज ठाकरे भी काफी व्यथित और परेशान हैं। संजय राउत ने राज ठाकरे को सलाह दी कि जो स्थानीय नेतृत्व पार्टी की मूल नीतियों के खिलाफ जाकर काम कर रहा है, उन्हें तुरंत पार्टी से निलंबित कर देना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह कांग्रेस ने अंबरनाथ में भाजपा के साथ जाने वाले अपने 12 पार्षदों को बाहर का रास्ता दिखाया, वैसी ही हिम्मत मनसे नेतृत्व को भी दिखानी चाहिए।
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दलबदलुओं को बताया ‘राजनीतिक मनोरोगी’
संजय राउत ने उन नेताओं पर भी निशाना साधा जो सत्ता और स्वार्थ के लिए बार-बार पाला बदलते हैं। उन्होंने ऐसे नेताओं को “राजनीतिक मनोरोगी” (Political Mental Patients) या मानसिक रूप से अस्थिर करार दिया। राउत ने कहा कि जो लोग एक चिन्ह पर चुनाव जीतकर दूसरे गुट की मदद करते हैं, वे केवल अपने निजी स्वार्थ के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उद्धव ठाकरे ने इस पूरे मामले को बहुत गंभीरता से लिया है और गद्दारी करने वालों को महाराष्ट्र कभी माफ नहीं करेगा।
सर्वोच्च न्यायालय की भूमिका पर उठाए सवाल
अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए राउत ने न्यायपालिका को भी नहीं बख्शा। उन्होंने कहा कि दलबदल की इस बीमारी को समय रहते रोकना सर्वोच्च न्यायालय की जिम्मेदारी है, लेकिन बार-बार सुनवाई टलने से लोकतंत्र का नुकसान हो रहा है। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि अदालत द्वारा सुनवाई में देरी करना देश के पतन में हाथ बटाने जैसा है। राउत ने दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट के इस रुख से आम जनता का न्याय प्रणाली पर से विश्वास कम होता जा रहा है।
