Mumbai News: गेटवे ऑफ इंडिया के पास जेट्टी परियोजना पर लगा ब्रेक, स्थानीय लोग कर रहे विरोध, कहा- यह पर्यावरण के लिए खतरा

मुंबई में गेटवे ऑफ इंडिया के निकट प्रस्तावित यात्री जेट्टी का निर्माण स्थानीय लोगों के विरोध के कारण अटक गया है। स्थानीय लोगों का मानना है इससे पर्यावरण के लिए और विरासत स्थलों के लिए खतरा पैदा होगा।
गेटवे ऑफ इंडिया के पास जेट्टी परियोजना स्थानीय लोगों के विरोध के कारण अटकी
गेटवे ऑफ इंडिया (सोर्स: सोशल मीडिया)
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मुंबई: मुंबई के प्रसिद्ध स्थलों में से एक कोलाबा स्थित गेटवे ऑफ इंडिया नौका यातायात का केंद्र है, जो लोकप्रिय पर्यटन स्थल एलिफेंटा गुफाओं और मांडवा गांव तक पर्यटकों को पहुंचाने संबंधी दैनिक सेवाएं प्रदान करता है। मुंबई में गेटवे ऑफ इंडिया के निकट यात्री जेट्टी निर्माण किया जाना है। लेकिन फिलहाल यह परियोजना अटक गई है। प्रस्तावित जेट्टी और टर्मिनल का निर्माण गेटवे ऑफ इंडिया से लगभग 500 मीटर की दूरी पर रेडियो क्लब के पास होना है।

मुंबई में गेटवे ऑफ इंडिया के निकट प्रस्तावित यात्री जेट्टी का निर्माण स्थानीय लोगों के विरोध के कारण अटक गया है। स्थानीय लोगों का मानना है इससे पर्यावरण के लिए और विरासत स्थलों के लिए खतरा पैदा होगा। यह परियोजना महाराष्ट्र समुद्री बोर्ड द्वारा पूरी की जानी है।

स्थानीय लोगों को राजनेताओं का मिल रहा साथ

स्थानीय निवासियों के 229 करोड़ रुपये की इस परियोजना के खिलाफ एकजुट होने के बीच, उन्हें विभिन्न दलों के राजनेताओं से समर्थन मिल रहा है। हालांकि राज्य सरकार ने उनकी चिंताओं को दूर करने का आश्वासन दिया है तथा इस बात पर जोर दिया है कि जेट्टी-सह-टर्मिनल भवन से आम लोगों को लाभ होगा। स्थानीय लोग इसे पर्यावरण के लिए और आसपास के क्षेत्र में स्थित ऐतिहासिक स्थलों के लिए खतरा बता रहे हैं। लोग परियोजना का विरोध करने के लिए ‘क्लीन हेरिटेज कोलाबा रेजिडेंट्स एसोसिएशन' (CHCRA) के बैनर तले एकजुट हुए हैं।

इन नेताओं ने किया प्रदर्शकारियों का समर्थन

राज्य विधानसभा अध्यक्ष और भाजपा विधायक राहुल नार्वेकर, शिवसेना के राज्यसभा सदस्य मिलिंद देवड़ा, दक्षिण मुंबई से शिवसेना (यूबीटी) के लोकसभा सदस्य अरविंद सावंत, समाजवादी पार्टी के नेता अबू आसिम आज़मी और अन्य राजनेताओं ने प्रदर्शनकारी निवासियों का समर्थन किया है। इस परियोजना को दो वर्ष में पूरा किया जाना है। जिसमें गेटवे ऑफ इंडिया से सभी नाव यातायात का मार्ग परिवर्तित करने, मौजूदा भीड़भाड़ को कम करने तथा पुराने ढांचों को उन्नत किया जाना है। उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने परियोजना के लिए 2025-26 के बजट में 229 करोड़ रुपये आवंटित किए। बंदरगाह मंत्री नितेश राणे ने 14 मार्च को भूमिपूजन किया।

जेट्टी निर्माण के लिए बनाए गए प्लेटफॉर्म को हटाया

जैसे-जैसे परियोजना आगे बढ़ी, स्थानीय निवासियों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने पत्रों, बैठकों और एक ऑनलाइन याचिका के माध्यम से एमएमबी अधिकारियों से सभी काम रोकने का आह्वान किया और मांग की कि परियोजना को दक्षिण मुंबई में किसी अन्य स्थान प्रिंसेस डॉक, फेरी घाट या बैलार्ड एस्टेट पर स्थानांतरित किया जाए। विरोध के कारण, जेट्टी निर्माण के लिए बनाए गए प्लेटफॉर्म को हटा दिया गया है।

सीएचसीआरए के प्रवक्ता रॉकी लोबो ने ‘पीटीआई-भाषा' को बताया कि गेटवे ऑफ इंडिया के पास प्रस्तावित जेट्टी ने नागरिकों, पर्यावरणविदों और विरासत संरक्षणवादियों के बीच व्यापक चिंता पैदा कर दी है। अगर यह परियोजना लागू की गई तो यह कोलाबा के सांस्कृतिक, पर्यावरणीय और सामाजिक ताने-बाने के नाजुक संतुलन को बिगाड़ देगी। हमें मुंबई की विरासत की रक्षा करनी है, यातायात की भीड़ को कम करना है और जलवायु परिवर्तन के बढ़ते खतरों का समाधान करना है।

क्या होता है जेट्टी?

जेट्टी (jetty) ऐसे ढांचे को कहते हैं जो जमीन से किसी जलाश्य में निकला हुआ हो। इसका उपयोग जलक्षेत्र और थल के बीच लोग नावों पर चढ़ने और उतरने के लिए करते हैं। यह मूल रूप से फ़्रान्सीसी भाषा के "जेते" (jetée) से उत्पन्न हुआ है, जिसका अर्थ "फेंका हुआ" होता है, लेकिन अब यह लगभग विश्व की हर भाषा में प्रयोग होता है।

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