प्रयागराज-कानपुर रूट पर ‘कवच’ सिस्टम लागू, ट्रेनें अब 160 किमी/घंटा रफ्तार से दौड़ेंगी
Prayagraj Kanpur Route Speed:‘कवच’ सिस्टम लागू कर भारतीय रेलवे ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। अब इस रूट पर ट्रेनें 160 किमी/घंटा की रफ्तार से चल सकेंगी और सुरक्षा भी बेहतर होगी।
- Written By: सूर्यप्रकाश मिश्र
कवच सिस्टम (सौ. सोशल मीडिया )
Indian Railway Kavach System Update: भारतीय रेल ने ट्रेनों के संचालन के दौरान सुरक्षा एवं गति पर विशेष ध्यान देते हुए ‘कवच’ सिस्टम पर तेजी से काम शुरू किया है।
इस दिशा में उत्तर मध्य रेलवे ने महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए रविवार को प्रयागराज-कानपुर सेक्शन के (190 रूट किलोमीटर) पर ‘कवच’ स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली को सफलतापूर्वक लागू कर दिया है।
‘कवच’ प्रणाली को औपचारिक तौर पर गाड़ी संख्या 14163 के माध्यम से लागू किया गया। ‘कवच’ सिस्टम वाली ट्रेनें अब इस रूट पर 160 किमी तक की रफ़्तार के साथ दौड़ सकेंगी।
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जीएम स्वयं रहे उपस्थित
उत्तर मध्य रेलवे की इस उपलब्धि का साक्षी बनते हुए ट्रेन के लोकोमोटिव में एनसीआर के जीएम एन.पी. सिंह स्वयं उपस्थित रहे। उन्होंने ‘कवच’ प्रणाली के प्रदर्शन का आकलन करने के लिए ट्रेन संख्या 14163 में सवार होकर सूबेदारगंज से मनौरी स्टेशन तक ‘फुटप्लेट निरीक्षण’ भी किया।
8 जोड़ी ट्रेनों में ‘कवच’
पहले चरण में, ‘कवच’ को इस मार्ग पर संचालित हो रही 8 जोड़ी ट्रेनों में लागू किया जाएगा। इनमें गाड़ी संख्या 14113/14114, 14163/14164, 12307/12308, 12417/12418, 22437/22438, 15003/15004, 20433/20434, और 12403/12404 में लागू किया जाएगा।
इसके अलावा अन्य ट्रेनों और ‘वंदे भारत’ ट्रेनों को भी धीरे-धीरे इसमें शामिल किया जाएगा। बताया गया कि यह शुरुआत भारतीय रेलवे के सबसे महत्वपूर्ण सेक्शनों में से एक पर 160 किमी/घंटा की गति से ट्रेन चलाने, रेलवे सुरक्षा को बढ़ाने और परिचालन दक्षता में सुधार करने की दिशा में मील का पत्थर है।
इस प्रणाली को शुरू करने से पहले, व्यापक और कड़े परीक्षण सफलतापूर्वक किए गए थे। इन परीक्षणों में WAP-7 लोकोमोटिव के साथ 8, 16 और 22 LHB कोच वाली संरचनाएं, और साथ ही 20 कोच वाली ‘वंदे भारत’ रेक शामिल रही। जिससे विभिन्न परिचालन स्थितियों के तहत प्रणाली की विश्वसनीयता सुनिश्चित हो सकी।
ट्रेन संख्या 15003/15004 (चौरी चौरा एक्सप्रेस) का उपयोग करके यात्री परीक्षण भी किए गए, जिन्होंने नियमित सेवा के दौरान लगातार और विश्वसनीय प्रदर्शन प्रदर्शित किया। 20,000 किलोमीटर से ज़्यादा की यात्री ट्रायल रन सफलतापूर्वक पूरी कर ली गई हैं। सभी सिस्टम जाँच संतोषजनक पाई गई हैं।
क्या है,कवच सिस्टम?
‘कवच’ ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत देश में ही बनाया गया एक ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम है। कवच सिस्टम ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन , खतरे के सिग्नल को पार करने से बचाव, इंसानी गलती होने पर अपने-आप ब्रेक लगना, आदि विशेषताओं के कारण रेलवे संरक्षा को काफ़ी बेहतर बनाता है। इसे भारतीय रेलवे में धीरे-धीरे लगाया जा रहा है, ताकि सुरक्षा को मज़बूत किया जा सके और ट्रेनों के संचालन को आधुनिक बनाया जा सके।
यह उपलब्धि प्रधान मुख्य संकेत एवं दूरसंचार इंजीनियर सतेंद्र कुमार के नेतृत्व में उत्तर मध्य रेलवे की सिग्नल और टेलीकम्युनिकेशन टीम की लगन भरी कोशिशों और तालमेल से किए गए काम से संभव हो सका है। इस कार्य में सभी संबंधित विभागों का सहयोग मिला।
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जीएम एन.पी सिंह के अनुसार उत्तर मध्य रेलवे
आधुनिक संरक्षा तकनीकों को अपनाने और भारतीय रेलवे के सुरक्षा ढाँचे को मज़बूत करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। इसका मकसद यात्रियों के लिए ट्रेनों का संचालन ज़्यादा सुरक्षित, भरोसेमंद और कुशल बनाना है। बताया गया कि अगले चरण में, ‘मिशन रफ़्तार’ के लक्ष्यों में से एक के तौर पर, गाज़ियाबाद-टुंडला सेक्शन में कवच सिस्टम लगाया जाएगा, ताकि ट्रेनों को 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से चलाया जा सके।
मुंबई से नवभारत लाइव के लिए सूर्यप्रकाश मिश्र की रिपोर्ट
