Hussain Dalwai on Khamenei Death (डिजाइन फोटो)
Hussain Dalwai Slams Nitesh Rane: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु के बाद उपजे वैश्विक तनाव की गूँज अब महाराष्ट्र की राजनीति में भी सुनाई दे रही है। कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने खामेनेई की मौत पर हो रहे प्रदर्शनों का समर्थन करते हुए अमेरिका और इजरायल की नीतियों की कड़ी आलोचना की है। इसके साथ ही उन्होंने राज्यसभा और विधान परिषद की सीटों को लेकर महाविकास अघाड़ी (MVA) के भीतर चल रही खींचतान और कोंकण के पर्यावरणीय मुद्दों पर भी अपनी बेबाक राय रखी है।
खामेनेई के निधन के बाद सोनिया गांधी द्वारा सरकार की चुप्पी पर उठाए गए सवालों को दलवई ने जायज ठहराया है।
हुसैन दलवई ने खामेनेई की मौत को एक मुखिया की हत्या करार देते हुए कहा कि जिस तरह से उन्हें निशाना बनाया गया, वह निंदनीय है। उन्होंने कहा, “खामेनेई वहां के प्रमुख थे। उनकी मौत पर यदि लोग दुखी होकर प्रदर्शन कर रहे हैं, तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है।” दलवई ने अमेरिका पर निशाना साधते हुए कहा कि अमेरिका यह तय नहीं कर सकता कि दुनिया और दूसरे देश कैसे चलेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका और इजरायल अपनी मर्जी पूरी दुनिया पर थोपना चाहते हैं, जो पूरी तरह गलत है।
ये भी पढ़ें- ‘वर्षा’ बंगले पर फडणवीस परिवार की इको-फ्रेंडली होली, मेयर रितु तावड़े ने फूलों से मनाया उत्सव
सोनिया गांधी द्वारा लिखे गए लेख का समर्थन करते हुए दलवई ने केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ईरान-भारत संबंध हमेशा से ऐतिहासिक और मधुर रहे हैं, फिर भी तीन-चार दिन बीत जाने के बाद भी सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया न आना आश्चर्यजनक है। दलवई के अनुसार, भारत को इस संकट में मध्यस्थता की अगुवाई करनी चाहिए थी ताकि युद्ध को बढ़ने से रोका जा सके और बातचीत के जरिए समाधान निकाला जा सके।
राज्यसभा सीट को लेकर एमवीए में मचे घमासान पर दलवई ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस ने एक अच्छा फॉर्मूला दिया है। उन्होंने सुझाव दिया कि वर्तमान सीट कांग्रेस को दी जाए और दो साल बाद इसे बदला जा सकता है। वहीं, उन्होंने उद्धव ठाकरे को विधान परिषद चुनाव लड़ने की सलाह दी। इसके अलावा, उन्होंने मंत्री नितेश राणे पर तीखा हमला करते हुए कहा कि उन्हें ‘हिंदू-मुस्लिम’ करने के बजाय अपने मंत्रालय और कोंकण के विकास पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने चिंता जताई कि केमिकल इंडस्ट्री के कारण कोंकण की 132 प्रजातियों की मछलियां खत्म हो रही हैं, जिस पर मंत्री को काम करने की जरूरत है।