ईरान-इजरायल जंग: खामेनेई की मौत पर पीएम मोदी की चुप्पी, प्रियंका चतुर्वेदी ने पूछा तीखा सवाल, हमलावर विपक्ष

Priyanka Chaturvedi on Iran Israel Conflict: अयातुल्ला खामेनेई के निधन पर पीएम मोदी की चुप्पी को लेकर शिवसेना सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने सवाल उठाए। भारत की विदेश नीति पर छिड़ी नई बहस।
Priyanka Chaturvedi on Iran Israel Conflict
Priyanka Chaturvedi on Iran Israel Conflict (फोटो क्रेडिट-X)
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PM Modi on Iran Israel Conflict: ईरान और इजरायल के बीच चल रहे भीषण संघर्ष और ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद भारत में राजनीतिक पारा चढ़ गया है। इस संवेदनशील वैश्विक मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की "चुप्पी" को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। शिवसेना (UBT) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने पीएम मोदी की विदेश नीति पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि भारत सरकार निष्पक्ष रहने के बजाय एक पक्ष की ओर झुकती नजर आ रही है।

जहाँ प्रधानमंत्री ने इजरायल और यूएई (UAE) के राष्ट्राध्यक्षों से फोन पर बात कर एकजुटता जताई है, वहीं ईरान को लेकर अब तक कोई आधिकारिक संवेदना संदेश जारी नहीं होने पर विवाद खड़ा हो गया है।

प्रियंका चतुर्वेदी ने उठाए भारत की विदेश नीति पर सवाल

शिवसेना सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर अपनी पोस्ट के जरिए केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सवाल किया कि यदि ईरान के साथ भारत के ऐतिहासिक और अच्छे संबंध हैं, तो अयातुल्ला खामेनेई के निधन पर शोक क्यों नहीं व्यक्त किया गया? प्रियंका ने लिखा, "ऐसा लगता है कि भारत सरकार ने एक पक्ष चुन लिया है। भारत में शिया समुदाय की एक बड़ी आबादी है और हमें तेहरान के साथ अपने संबंधों को संतुलित रखने की जरूरत है।" उन्होंने सरकार के मौजूदा कूटनीतिक रुख को एकतरफा बताया।

प्रधानमंत्री की यूएई और इजरायल से बातचीत

प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से फोन पर बात की और खाड़ी देश पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की। पीएम ने मुश्किल घड़ी में यूएई के साथ खड़े रहने का भरोसा दिया और वहां रहने वाले भारतीय समुदाय की सुरक्षा के लिए राष्ट्रपति का आभार व्यक्त किया। इसी कड़ी में, पीएम मोदी ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से भी चर्चा की। इस दौरान उन्होंने हालिया घटनाक्रम पर भारत की चिंता व्यक्त करते हुए आम नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने पर जोर दिया।

ईरान पर चुप्पी और कूटनीतिक संतुलन की चुनौती

विपक्ष का मुख्य तर्क यह है कि भारत हमेशा 'गुटनिरपेक्षता' और संतुलन की नीति पर चलता रहा है, लेकिन खामेनेई की मौत पर प्रधानमंत्री की ओर से प्रतिक्रिया न आना इस संतुलन को बिगाड़ सकता है। ईरान भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, विशेषकर चाबहार पोर्ट और ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से। प्रियंका चतुर्वेदी और अन्य विपक्षी नेताओं का मानना है कि केवल इजरायल और यूएई के प्रति सहानुभूति दिखाना भारत के दूरगामी हितों को प्रभावित कर सकता है। अब देखना यह है कि विदेश मंत्रालय इस आलोचना पर क्या प्रतिक्रिया देता है।

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