

Girgaon Magistrate Court News: पत्नी के रंग, बाल और ड्रेसिंग सेंस पर टिप्पणी करने वाले पति को अदालत ने कड़ी फटकार लगाई है। मुंबई के गिरगांव मजिस्ट्रेट कोर्ट ने इस तरह के व्यवहार को साफ तौर पर मानसिक उत्पीड़न माना और घरेलू हिंसा कानून के तहत पति को हर महीने 25 हजार रुपये का गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया। यह फैसला मजिस्ट्रेट एस.आर. निमसे ने सुनाया। महिला ने 2005 के घरेलू हिंसा कानून की धारा 23 के तहत अंतरिम राहत की मांग करते हुए याचिका दायर की थी।
पीड़िता ने कोर्ट में हर महीने 60 हजार रुपये का गुजारा भत्ता मांगा था, लेकिन पति की आर्थिक क्षमता और महिला की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए अदालत ने उसे 25 हजार रुपये प्रति माह भत्ता मंजूर किया।
दोनों की शादी 4 दिसंबर 2016 को हुई थी और 20 अगस्त 2022 को वे अलग हो गए थे। महिला का आरोप था कि उसे दहेज के लिए परेशान किया जाता था और साथ ही उसके रंग, बाल और कपड़ों के चुनाव को लेकर अपमानजनक बातें कही जाती थीं। इसे घरेलू उत्पीड़न बताते हुए उसने गुजारा भत्ता की मांग की। सुनवाई के दौरान पति ने आर्थिक रूप से असमर्थ होने का दावा करते हुए जिम्मेदारी से बचने की कोशिश की, जिस पर अदालत ने उसे कड़ी नसीहत दी।
अदालत ने कहा कि पत्नी चाहे जितनी भी आय अर्जित करती हो, इससे पति के कर्तव्य पर कोई असर नहीं पड़ता। पत्नी की कमाई गुजारा भत्ता के अधिकार में बाधा नहीं बन सकती। गुजारा भत्ता महिला का एक स्वतंत्र अधिकार है और इस पर वैवाहिक विवादों से अलग विचार किया जाना चाहिए। साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि पति केवल नौकरी छोड़ने की बात कहकर अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकता।