महाराष्ट्र में महापौर और पार्षदों का कार्यकाल ढाई या 5 साल का ? जानिए क्या है मेयर चयन का फॉर्मूला
Mayor Election: महाराष्ट्र की 29 महानगरपालिकाओं में चुनावी प्रक्रिया संपन्न होने के बाद अब महापौर की कुर्सी को लेकर रस्साकशी शुरू हो गई है। जानिए क्या है पार्षदों और मेयर के चयन का फार्मूला।
- Written By: आकाश मसने
कॉन्सेप्ट फोटो (डिजाइन फोटो)
Maharashtra Mayor Tenure News: महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजे आने के बाद राज्य की राजनीति में अब ‘महापौर’ पद को लेकर हलचल तेज है। 16 जनवरी 2026 को घोषित परिणामों ने नगर निगमों की तस्वीर बदल दी है। आइए समझते हैं कि आखिर पार्षद कैसे चुने गए और मेयर की कुर्सी का नया समीकरण क्या है। साथ ही यह भी जानेंगे कि इनका कार्यकाल कितने साल का हाेता है।
महाराष्ट्र के महानगरपालिका में पार्षदों का चयन हर 5 वर्ष की अवधि के लिए किया जाता है। हाल ही में 15 जनवरी 2026 को प्रदेश की 29 प्रमुख महानगरपालिकाओं के लिए मतदान प्रक्रिया पूरी हुई। जिनमें मुंबई (BMC), पुणे और नागपुर जैसे महानगर शामिल हैं।
16 जनवरी को आए परिणामों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि नगर निगमों में सत्ता का समीकरण बदल चुका है। कई पुराने और दिग्गज पार्षदों को जनता ने नकार दिया है, जिसके चलते अब सदनों में नए चेहरों की फौज दिखाई देगी। नियम के अनुसार, पिछले सदन के पार्षदों का कार्यकाल समाप्त हो चुका है और अब नए निर्वाचित जनप्रतिनिधि ही शहर के विकास की बागडोर संभालेंगे।
सम्बंधित ख़बरें
तोता, हाईकोर्ट और किसान, 10 साल बाद मिली जीत, सरकार को देना होगा अनार के बागवान को मुआवजा
नींद में लगा पैर तो ले ली जान! सोलापुर के मीनाक्षी नगर में सनसनीखेज मर्डर; आरोपी गिरफ्तार
Mumbai Operation Khatara Update: BMC ने 10 हजार से ज्यादा स्क्रैप किए, अभियान जारी
Mahim Bandra Flyover Project: मुंबई में नया फ्लाईओवर प्रोजेक्ट, 220 करोड़ की योजना से 25 मिनट कम होगा सफर
क्या है मेयर चुनाव का फॉर्मूला?
नगर निगम चुनाव में जनता सीधे महापौर (मेयर) का चुनाव नहीं करती है। इसके बजाय, जनता द्वारा चुने गए पार्षद सदन में वोटिंग के जरिए अपने मुखिया का चुनाव करते हैं। महाराष्ट्र में महापौर के कार्यकाल को लेकर एक विशेष फॉर्मूला लागू है।
मेयर का कार्याकाल कितने साल का होता है?
हालांकि एक महानगरपालिका का कार्यकाल 5 साल का होता है, लेकिन महापौर की कुर्सी पर एक व्यक्ति लगातार 5 साल तक नहीं बैठता। 5 साल के पूरे चक्र में ढाई-ढाई साल (2.5 + 2.5 वर्ष) के दो कार्यकाल होते हैं। पहले ढाई साल के बाद वहीं पार्षद फिर से मेयर का चुनाव करते हैं।
वर्तमान में मुंबई नगर निगम (BMC) जैसे महत्वपूर्ण निकायों में राजनीतिक दलों के बीच इसी ढाई साल के फॉर्मूले पर गहन चर्चा हो रही है, ताकि गठबंधन की सरकारों में सभी पक्षों को प्रतिनिधित्व मिल सके।
22 जनवरी को निकली आरक्षण लॉटरी
महापौर का पद किस श्रेणी के लिए आरक्षित होगा, इसका निर्णय सरकार ‘लॉटरी’ पद्धति से करती है। 22 जनवरी 2026 को महाराष्ट्र सरकार ने राज्य की सभी 29 महानगरपालिकाओं के लिए आरक्षण की स्थिति स्पष्ट कर दी है। इस बार का सबसे बड़ा अपडेट मुंबई (BMC) को लेकर है। बीएमसी के महापौर का पद इस बार ‘सामान्य वर्ग की महिला’ (General Category Woman) के लिए आरक्षित किया गया है। इसका अर्थ है कि देश की सबसे अमीर नगर पालिका की कमान इस बार एक महिला के हाथ में होगी। इसी तरह अन्य शहरों के लिए भी ओबीसी, एससी, एसटी और महिला आरक्षण की घोषणा की गई है।
यह भी पढ़ें:- जब बाल ठाकरे के खिलाफ पार्टी के सीनियर नेता ने खोला था मोर्चा; जूतों से हुई थी पिटाई, मुंह पर पोत दी थी कालिख
चुनावी प्रणाली: मुंबई बनाम शेष महाराष्ट्र
इस बार के चुनावों में मतदान की प्रक्रिया को लेकर दो अलग-अलग फॉर्मूले देखने को मिले। मुंबई को छोड़कर राज्य की अन्य 28 महानगर पालिकाओं में 4-सदस्यीय प्रभाग प्रणाली का उपयोग किया गया। इसमें एक ही वार्ड (प्रभाग) से 4 पार्षदों का चयन हुआ है।
मुंबई (BMC) मॉडल: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में पुरानी ‘एकल-वार्ड’ प्रणाली को ही बरकरार रखा गया। यहां 227 वार्डों में से प्रत्येक वार्ड से केवल एक ही पार्षद चुनकर आया है। अब सबकी नजरें महापौर पद के लिए होने वाले आंतरिक मतदान पर टिकी हैं, जो आगामी कुछ दिनों में संपन्न होगा।
