‘क्या पानसरे की हत्या में शामिल थे संजय गायकवाड़?’; विवादित ऑडियो के बाद हर्षवर्धन सपकाल ने की जांच की मांग
Sanjay Gaikwad Controversy: हर्षवर्धन सपकाल ने गोविंद पानसरे हत्याकांड में संजय गायकवाड़ की भूमिका की जांच की मांग की। किताब विवाद के बाद गरमाई राजनीति।
- Written By: अनिल सिंह
Harshvardhan Sapkal on Sanjay Gaikwad Govind Pansare (फोटो क्रेडिट-X)
Harshvardhan Sapkal on Sanjay Gaikwad Govind Pansare Case: महाराष्ट्र में ‘शिवाजी कोण होता?’ किताब को लेकर शुरू हुआ विवाद अब एक गंभीर आपराधिक जांच की मांग तक पहुंच गया है। शिवसेना (शिंदे गुट) के विधायक संजय गायकवाड़ द्वारा प्रकाशक प्रशांत अम्बी को दी गई ‘धमकी’ ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है। वायरल ऑडियो क्लिप में गायकवाड़ द्वारा कथित तौर पर प्रकाशक को गोविंद पानसरे जैसा अंजाम भुगतने की चेतावनी देने के बाद, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से इस मामले में विधायक की संलिप्तता की जांच करने की मांग की है।
हर्षवर्धन सपकाल ने ट्वीट कर सवाल उठाया कि क्या 2015 में हुए गोविंद पानसरे हत्याकांड के पीछे संजय गायकवाड़ का कोई हाथ था? उन्होंने मांग की है कि जिस तरह से विधायक ने प्रकाशक को पानसरे के नाम पर डराया है, उससे संदेह पैदा होता है कि क्या वे इस विचारधारात्मक हत्या की साजिश का हिस्सा रहे हैं।
बुलढाणा जिल्ह्याचे नाव बदनाम करण्याचा विडाच आमदार संजय गायकवाड या व्यक्तीने उचललाय. मग ते आमदार निवासातील कँटीन मधे हाणामारी करणे असो, सुरक्षेसाठी असणाऱ्या पोलिसांना स्वतःची गाडी धुवायला सांगणे असो की आता प्रशांत आंबी यांना धमकी असो. राज्यातील एक लोकप्रतिनिधी, सत्ताधारी पक्षातील… pic.twitter.com/rxRjBX2coa — Harshwardhan Sapkal (@INCHarshsapkal) April 23, 2026
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धमकियों और विवादों से पुराना नाता
विधायक संजय गायकवाड़ का राजनीतिक सफर विवादों से भरा रहा है। इससे पहले वे राहुल गांधी की जीभ काटने का इनाम घोषित करने और एक युवक के साथ सरेआम मारपीट करने के मामले में सुर्खियों में रह चुके हैं। इस बार, उन्होंने 1988 में प्रकाशित दिवंगत वामपंथी नेता गोविंद पानसरे की किताब के शीर्षक को छत्रपति शिवाजी महाराज का अपमान बताते हुए प्रकाशक को फोन पर अभद्र गालियां दीं, जिसे उन्होंने खुद स्वीकार भी किया है।
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कौन थे गोविंद पानसरे?
गोविंद पानसरे महाराष्ट्र के एक प्रसिद्ध तर्कवादी और वामपंथी विचारक थे। 16 फरवरी 2015 को कोल्हापुर में मॉर्निंग वॉक के दौरान बाइक सवार हमलावरों ने पानसरे और उनकी पत्नी उमा पर गोलियां चलाई थीं। 20 फरवरी 2015 को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में इलाज के दौरान 82 वर्षीय पानसरे का निधन हो गया था। यह मामला नरेंद्र दाभोलकर और गौरी लंकेश की हत्याओं की तरह ही ‘प्रगतिशील आवाजों’ को दबाने के रूप में देखा जाता है।
जांच की वर्तमान स्थिति
पानसरे हत्याकांड की जांच वर्तमान में एटीएस (ATS) कर रही है। हालांकि मामले में 12 संदिग्ध आरोपी सामने आए हैं और कुछ की गिरफ्तारियां भी हुई हैं, लेकिन दो शूटर अभी भी फरार हैं। परिवार आज भी न्याय का इंतजार कर रहा है। अब संजय गायकवाड़ की ताजा धमकी ने इस ठंडे पड़ चुके मामले की चिंगारी को फिर से हवा दे दी है। कांग्रेस ने मांग की है कि मुख्यमंत्री को इस बयान को गंभीरता से लेते हुए विधायक की गतिविधियों की गहन जांच करानी चाहिए।
