गोवंडी-मानखुर्द में अवैध स्कूल और अस्पतालों का जाल, बच्चों के भविष्य और मरीजों की जान पर खतरा
Govandi Mankhurd Illegal Schools: गोवंडी-मानखुर्द क्षेत्र में अवैध स्कूलों और फर्जी अस्पतालों का बड़ा नेटवर्क सामने आया है। आरोप है कि बिना मान्यता वाले संस्थान बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे।
- Written By: अपूर्वा नायक
गोवंडी अवैध स्कूल केस (सौ. सोशल मीडिया )
Govandi Mankhurd Illegal Schools News: मुंबई के एम-पूर्व वार्ड के अंतर्गत आने वाले गोवंडी-मानखुर्द इलाकों से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जहां शिक्षा और स्वास्थ्य के नाम पर लाखों जनता के साथ खुलेआम खिलवाड़ हो रहा है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस क्षेत्र में बिना किसी रजिस्ट्रेशन के लगभग 30 अवैध अस्पताल और बिना मान्यता के करीब 60 स्कूल धड़ल्ले से चल रहे हैं। सबसे गंभीर बात यह है कि यहां 200 से अधिक फर्जी डॉक्टर अपनी डिस्पेंसरी खोलकर लोगों के इलाज के नाम पर ‘मौत’ बांट रहे हैं। इस भयावह स्थिति के लिए सीधे तौर पर बीएमसी का शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग कटघरे में है।
वहीं स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी इस पूरे गोरखधंधे पर ‘धृतराष्ट्र’ की तरह आंखें मूंदे बैठे हैं। इन अधिकारियों की कथित मिलीभगत और लापरवाही के कारण ही, आज क्षेत्र के बच्चों का भविष्य और मरीजों की जान खतरे में पड़ी हुई है।
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खुलेआम बीएमसी की नाक के नीचे ‘अवैध साम्राज्य’ चल रहा है, लेकिन स्थानीय जनप्रतिनिधि इसके खिलाफ कोई आवाज नहीं उठाते। लोगों का कहना है कि। क्या गोवंडी-मानखुर्द इलाके के लोगों को सिर्फ वोट बैंक समझा गया है? उनकी जिंदगी और उनके बच्चों के भविष्य की कोई अहमियत नहीं है।
शिक्षा के नाम पर धोखा
- गोवंडी, शिवाजी नगर, बैगनवाड़ी, गौतम नगर, मानखुर्द और चीता कैंप आदि इलाकों में चल रहे अवैध स्कूलों में अभिभावकों से कथित तौर पर भारी-भरकम फीस वसूली जा रही है।
- अब जब बीएमसी और सरकार ने इन अवैध स्कूलों पर कार्रवाई शुरू कर दी है, तो इन स्कूलों में पढ़ रहे हजारों बच्चों का भविष्य अनिश्चित हो गया है?
- अभिभावकों के मन में कई सवाल उठ रहे हैं कि, इन अवैध स्कूलों द्वारा जारी किए गए सर्टिफिकेट की क्या मान्यता होगी? क्या ये सर्टिफिकेट बोर्ड परीक्षा, आगे की पढ़ाई या नौकरी के लिए मान्य होंगे? या बच्चों की उम्र निकल जाने और बहुमूल्य समय की बर्बादी के अलावा कुछ नहीं मिलेगा?
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मुन्ना भाई कर रहे इलाज, प्रशासन मौन
इसी तरह बिना रजिस्ट्रेशन के चल रहे हॉस्पिटल और नर्सिंग होमों में अशिक्षित नर्स तथा अन्य स्वास्थ्य कर्मचारियों को रखकर मरीजों की जिंदगी से खेला जा रहा है। इन अवैध हॉस्पिटलों की लापरवाही के कारण कई मरीजों की मौत भी हो चुकी है। बीएमसी का स्वास्थ्य विभाग कार्रवाई के नाम पर कछुए की चाल चलता है। जिसके कारण पीड़ित परिवारों को न्याय मिलने में सालों इंतजार करना पड़ता है। इसके बाद हॉस्पिटल अपना नाम बदलकर दूसरे नाम से फिर से चलना शुरू कर देते हैं।
मुंबई से नवभारत लाइव के लिए तारिक खान की रिपोर्ट
