

Ganeshotsav And Navratri Child Safety Guidelines: महाराष्ट्र में गणेशोत्सव की धूम के बीच पंडालों और दर्शन स्थलों पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन सतर्क हो गया है। हाल ही में मुंबई के कालाचौकी इलाके में एक दुर्भाग्यपूर्ण हादसे के दौरान बिजली का करंट लगने से एक मासूम बच्ची की मौत हो गई थी। इस घटना को बेहद गंभीरता से लेते हुए महाराष्ट्र राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग (MSCPCR) ने राज्यभर के पुलिस प्रशासन और गणेशोत्सव आयोजकों के लिए कड़े सुरक्षा दिशानिर्देश जारी किए हैं।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि त्योहारों का आनंद तभी सार्थक है जब हमारे बच्चे हर स्थिति में सुरक्षित रहें। इसी उद्देश्य से एडवोकेट संजय पुराणिक की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय ऑनलाइन सुनवाई आयोजित की गई, जिसमें राज्य के 8 महानिरीक्षक (IGP) कार्यालयों और 12 पुलिस कमिश्नरेट के शीर्ष अधिकारियों ने भाग लिया। सुनवाई के दौरान जरूरी सावधानियों और सुरक्षा उपायों के बारे में निर्देश दिए गए।
सुनवाई के दौरान आयोग के वरिष्ठ सदस्यों और पुलिस अधिकारियों ने सुरक्षा प्रोटोकॉल की गहन समीक्षा की। आयोग ने संयुक्त रूप से पुलिस प्रशासन, स्थानीय निकायों, गणेश मंडलों, बाल कल्याण एजेंसियों और मीडिया से अपील की है कि वे बच्चों के अधिकारों और उनकी सुरक्षा के लिए एक मजबूत सुरक्षा चक्र तैयार करें।
सुनवाई में आयोग के सदस्य और संबंधित पुलिस अधिकारी शामिल हुए। आयोग ने पुलिस, स्थानीय प्रशासन, गणेश मंडलों, बाल संरक्षण एजेंसियों और मीडिया से बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा और सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करने का आग्रह किया।
भीड़-भाड़ वाले प्रमुख गणेश पंडालों में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष पुलिस यूनिट्स बनाई जाएंगी। इसके साथ ही, महिला पुलिस कर्मियों और विशेष रूप से प्रशिक्षित 'दामिनी स्क्वाड' की तैनाती की जाएगी, जो संदिग्ध गतिविधियों और बच्चों की सुरक्षा पर सीधी नजर रखेगी। पूरे पंडाल परिसर में हाई-रिजाॅल्यूशन CCTV कैमरों से निगरानी रखने के निर्देश जारी किए गए।
भीड़ के दबाव को देखते हुए आयोग ने निर्देश दिया है कि प्रत्येक बड़े पंडाल में चौबीसों घंटे 108 एम्बुलेंस और फर्स्ट-एड की व्यवस्था हो। पीने का स्वच्छ पानी और साफ-सुथरे शौचालय उपलब्ध हों। धूप व बारिश से बचाव के लिए छायादार स्थान और एक सुरक्षित 'वेटिंग जाेन' बनाया जाए, ताकि अभिभावकों से बिछड़ने पर बच्चों को वहां सुरक्षित रखा जा सके।
त्योहार वाली जगहों पर बच्चों से भीख मंगवाने या बाल श्रम जैसे शोषण को रोकने के लिए खास अभियान चलाए जाने चाहिए और जरूरी कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। इसके अलावा, पुलिस प्रशासन और गणेश मंडलों को निर्देश दिया गया कि वे आने वाले दुर्गोत्सव को चाइल्ड फ्रेंडली बनाने के लिए अभी से योजना बनाना शुरू कर दें।