कौन हैं संजय पांडे? हार्वर्ड ग्रेजुएट से जेल की हवा तक; फडणवीस-शिंदे को फंसाने के आरोपी की A टू Z कुंडली
Who Is Sanjay Pandey: NSE फोन टैपिंग केस में पूर्व मुंबई पुलिस कमिश्नर संजय पांडे की गिरफ्तारी ने सबको चौंका दिया है। IIT कानपुर से पढ़ाई और 'सुपरकॉप' की छवि वाले पांडे कैसे विवादों में घिरे?
- Written By: आकाश मसने
पूर्व मुंबई पुलिस कमिश्नर संजय पांडे (सोर्स: सोशल मीडिया)
Former Mumbai CP Sanjay Pandey: कभी मुंबई के ‘रक्षक’ रहे 1986 बैच के पूर्व IPS अधिकारी संजय पांडे आज सलाखों के पीछे हैं। NSE कर्मचारियों की अवैध फोन टैपिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोपों में ED ने उन्हें गिरफ्तार किया है। सेवानिवृत्ति के कुछ ही दिनों बाद हुई इस कार्रवाई ने महाराष्ट्र के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।
रिटायरमेंट के बाद गिरफ्तारी
संजय पांडे मुंबई के ऐसे दूसरे पुलिस कमिश्नर बन गए हैं, जिन्हें रिटायरमेंट के फौरन बाद गिरफ्तार किया गया है। इससे पहले तेलगी घोटाले में आर.एस. शर्मा की गिरफ्तारी हुई थी। पांडे पर आरोप है कि उन्होंने 2009 से 2017 के बीच नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के कर्मचारियों के फोन अवैध रूप से टैप किए, जिसमें मनी लॉन्ड्रिंग का पहलू भी शामिल है।
IIT कानपुर से IPS बनने तक का शानदार सफर
59 वर्षीय संजय पांडे का शैक्षणिक रिकॉर्ड बेहद प्रभावशाली रहा है। मुंबई में प्राथमिक शिक्षा के बाद, उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थान IIT कानपुर से कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग (B.Tech) की। पुलिस बल में आने से पहले उन्होंने एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में भी काम किया। 1986 में उन्होंने पुलिस सेवा जॉइन की और अपनी तकनीकी समझ का इस्तेमाल विभाग के आधुनिकीकरण में किया।
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धारावी दंगे और एमनेस्टी इंटरनेशनल से सम्मान
संजय पांडे की पहचान एक सख्त और निष्पक्ष अधिकारी के रूप में रही। 1992-93 के मुंबई दंगों के दौरान जब धारावी जल रहा था, तब बतौर DCP उन्होंने स्थिति को बेहद कुशलता से संभाला। उनकी इस निष्पक्ष कार्यशैली के लिए मानवाधिकार संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी उन्हें सम्मानित किया था। इसके बाद उन्होंने आर्थिक अपराध शाखा में रहते हुए प्रसिद्ध ‘मोची घोटाले’ का पर्दाफाश किया।
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हार्वर्ड की पढ़ाई और नौकरी से इस्तीफा
पांडे का करियर उतार-चढ़ाव भरा रहा। 1998 में वे मास्टर डिग्री के लिए हार्वर्ड यूनिवर्सिटी (USA) गए। साल 2000 में जांच कार्यों में राजनीतिक हस्तक्षेप से तंग आकर उन्होंने सेवा से इस्तीफा दे दिया। इसी दौरान उन्होंने प्राइवेट सेक्टर में कदम रखा और ‘आईसेक सिक्योरिटीज प्राइवेट लिमिटेड’ नामक कंपनी बनाई। यही वह कंपनी है, जिसने NSE के साथ काम किया और आज पांडे की मुश्किलों की मुख्य वजह बनी है। 19 सितंबर 2024 को संजय पांडे कांग्रेस में शामिल हो गए। सांसद वर्षा गायकवाड़ ने उन्हें कांग्रेस की सदस्यता दिलाई थी।
संजय पांडे का कांग्रेस में स्वागत करतीं सांसद वर्षा गायकवाड
उद्धव सरकार में ‘भाग्य’ का उदय और विवाद
2011 में पांडे दोबारा पुलिस बल में लौटे, लेकिन कई वर्षों तक उन्हें कोई बड़ी पोस्टिंग नहीं मिली। 2021 में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली MVA सरकार ने उन्हें अचानक महाराष्ट्र का कार्यवाहक DGP और फिर मुंबई पुलिस कमिश्नर बना दिया। इस नियुक्ति पर काफी विवाद हुआ क्योंकि आरोप लगे कि सरकार ने कई वरिष्ठ अधिकारियों को नजरअंदाज कर पांडे को चुना ताकि वे सरकार के इशारों पर काम कर सकें।
क्या है ‘आईसेक’ और फोन टैपिंग का मामला?
संजय पांडे द्वारा स्थापित कंपनी ‘आईसेक सिक्योरिटीज’ को NSE के ऑडिट और साइबर सुरक्षा का काम मिला था। आरोप है कि इसी की आड़ में कर्मचारियों के फोन अवैध रूप से टैप किए गए। CBI और ED की जांच में सामने आया कि यह पूरी प्रक्रिया नियमों के खिलाफ थी और इसमें करोड़ों रुपयों का अवैध लेनदेन हुआ। 30 जून 2022 को रिटायर होते ही केंद्रीय एजेंसियां उनके पीछे लग गईं, जिसका नतीजा उनकी गिरफ्तारी के रूप में सामने आया।
