मुंबई में पुलिस लिखी कार से ड्रग्स तस्करी का पर्दाफाश, 1.08 लाख के मेफेड्रोन के साथ 3 आरोपी गिरफ्तार

Crime News Mumbai: डोंगरी पुलिस ने फर्जी नंबर प्लेट और कार पर 'पुलिस' लिखकर मेफेड्रोन बेचने वाले 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। उनके पास से 1.08 लाख रुपये का ड्रग्स जब्त किया गया।
Drug smuggling using a car marked 'Police' busted in Mumbai; 3 accused arrested with drugs worth ₹1.08 lakh
डोंगरी पुलिस ने मेफेड्रोन, ड्रग्स जब्त कियासोर्स-सोशल मीडिया
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Mumbai Drug Smuggling Case: डोंगरी पुलिस ने फर्जी पुलिस नंबर प्लेट और कार पर पुलिस लिखकर कथित तौर पर ड्रग्स की तस्करी करने के आरोप में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान जमीर सिद्दीक सैयद (26), सोमनाथ शरद महाजन (30) और मोहम्मद जीशान अफसर सैयद (29) के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने कार्रवाई से बचने के लिए निजी कार पर फर्जी पुलिस पहचान का इस्तेमाल किया था।

वादी बंदर में संदिग्ध कार पर नजर

पुलिस के मुताबिक, यह कार्रवाई डोंगरी के वादी बंदर इलाके में सुन्नी मस्जिद के पास गश्त के दौरान की गई। पुलिस टीम ने वहां संदिग्ध अवस्था में खड़ी एक कार को देखा। कार पर पुलिस से संबंधित फर्जी पहचान और नंबर प्लेट लगी थी। संदेह होने पर पुलिस ने वाहन की तलाशी ली।

7.2 ग्राम मेफेड्रोन जब्त

गवाहों की मौजूदगी में की गई तलाशी के दौरान आरोपियों के पास से 7.2 ग्राम मेफेड्रोन बरामद हुआ। पुलिस के अनुसार, जब्त ड्रग्स की अनुमानित कीमत करीब 1.08 लाख रुपये है। इसके बाद पुलिस ने तीनों आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की।

पूछताछ में सामने आया ड्रग्स का स्रोत

प्रारंभिक पूछताछ में जमीर और सोमनाथ ने कथित तौर पर पुलिस को बताया कि उन्होंने यह ड्रग्स मोहम्मद जीशान से खरीदा था। इस जानकारी के आधार पर पुलिस ने जीशान को भी गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अब आरोपियों के बीच ड्रग्स की खरीद-फरोख्त से जुड़े संबंधों की जांच कर रही है।

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NDPS एक्ट के तहत मामला दर्ज

डोंगरी पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट (NDPS) और अन्य संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें पुलिस हिरासत में भेज दिया गया।

सप्लाई नेटवर्क और वित्तीय लेनदेन की जांच

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों को मेफेड्रोन कहां से मिला था और इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। इसके अलावा पुलिस ड्रग्स की खरीद-बिक्री से जुड़े वित्तीय लेनदेन और वितरण नेटवर्क की भी जांच कर रही है। फर्जी पुलिस पहचान का इस्तेमाल कितने समय से किया जा रहा था, इसकी भी जानकारी जुटाई जा रही है।

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